टेरर का टेंशन: सोशल मीडिया के जरिए हो रहा है नौजवानों का ब्रेनवॉश

मुंबई पुलिस कमिश्नर अहमद जावेद ने कहा कि हमारे राज्य से चार नौजवान आईएसआईएस में शामिल होने के लिए गए थे. लोगों के ब्रेनवॉश के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जा रहा है. वहां इस तरह के कंटेंट डाले जा रहे है, जिससे लोग भ्रमित हो रहे हैं.

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एजेंडा आज तक के पांचवें सत्र का विषय 'टेरर का टेंशन' था एजेंडा आज तक के पांचवें सत्र का विषय 'टेरर का टेंशन' था

मुकेश कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 12 दिसंबर 2015,
  • अपडेटेड 11:36 PM IST

एजेंडा आज तक के दूसरे दिन के पांचवें सत्र का विषय 'टेरर का टेंशन' था. इस सत्र में मुंबई पुलिस कमिश्नर अहमद जावेद, बंगलुरु पुलिस कमिश्नर एन. एस. मेघारिख और दिल्ली पुलिस कमिश्नर भीम सिंह बस्सी मेहमान थे. आजतक के एंकर गौरव सावंत ने इन मेहमानों से बेबाक बातचीत की.

मुंबई पुलिस कमिश्नर अहमद जावेद ने कहा कि हमारे राज्य से चार नौजवान आईएसआईएस में शामिल होने के लिए गए थे. लोगों के ब्रेनवॉश के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जा रहा है. वहां इस तरह के कंटेंट डाले जा रहे है, जिससे लोग भ्रमित हो रहे हैं.

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दक्षिण भारत में आईएसआईएस के खतरे पर बंगलुरु पुलिस कमिश्नर एन. एस. मेघारिख ने कहा कि सोशल मीडिया के साथ ही स्थानीय मुद्दों की वजह से लोग इस आतंकी संगठन की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. हमें उन पर भी ध्यान देना होगा.

पढ़े-लिखे लड़के जो अच्छा कमाते हैं, वो भी आतंक की तरफ जा रहे हैं इस सवाल पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर भीम सिंह बस्सी ने कहा कि भारत के लिए आतंक कोई नई बात नहीं है. 80 के दशक से ही इसको हम झेल रहे हैं, जो आज भी जारी है.


उन्होंने कहा कि इंडियन मुजाहिदीन के रूप में भारतीय मुस्लिम युवाओं का एक नया चेहरा सामने आया था. भारत नौजवानों को गुमराह करके आतंकी गतिविधियों में शामिल किया गया. सोशल मीडिया के जरिए इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा मिला है.

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बस्सी ने कहा कि यह कोई जरूरी नहीं है कि जिसके पास पैसा हो वो आतंक की तरफ नहीं बढ़ेगा. आतंकी गतिविधियों में शामिल लोगों पर हमारी नजर बनी रहती हैं. जो पकड़े गए हैं, उन पर भी हमारी नजर थी. जब सिर से पानी उपर निकल गया, तो इनको गिरफ्तार कर लिया गया.


खतरा हमेशा बना रहता है. क्या आज की तारीख में दिल्ली और बंगलुरु जैसे शहर सुरक्षित हैं? यह एक बड़ा सवाल है. इस पर अहमद जावेद ने कहा कि सभी बड़े शहरों में हुए हमले माड्यूल बेस्ड थे. वह चाहे मुंबई में 26/11 का हमला हो या हालही में पेरिस में हुआ हमला.


हमने आतंक का दंश तब झेला है, जब दुनिया इसे समझती भी नहीं थी. इंडियन पुलिस को काफी बदनाम किया जाता रहा है. यह एक फैशन बन गया. कहा गया कि यहां कम्युनिटी फ्रेंडली पुलिस की जरूरत है. पर सच ये है कि इंडिया की पुलिस का मॉडल कम्युनिटी फ्रेंडली ही है.

 

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