इजरायल से भारत को मिलेंगे मिसाइल से लैस 10 ड्रोन, खुफिया जानकारी जुटाने में भी सक्षम

हेरोन टीपी ड्रोन मिसाइल से लैस होते हैं. इनकी तुलना अमेरिका के प्रिडेटर और रीपर ड्रोन से की जाती है. इजरायल में हेरोन टीपी ड्रोन इटियन के नाम से जाना जाता है, जो लगातार 30 घंटे की उड़ने की क्षमता रखता है.

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ड्रोन के लिए 400 मिलियन डॉलर की डील ड्रोन के लिए 400 मिलियन डॉलर की डील

सुरभि गुप्ता

  • नई दिल्ली,
  • 04 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 5:09 PM IST

कुछ देर बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल के तेल अबीब पहुंच जाएंगे. इस दौरे पर भारत को दुश्मनों को नेस्तनाबूत करने वाला ताकतवर ड्रोन मिलने वाला है. पीएम मोदी के दौरे पर इजराइल के 10 हेरोन टीपी ड्रोन को लेकर अहम डील होने वाली है, जो 400 मिलियन डॉलर का करार होगा.

भारतीय पीएम का पहला इजरायल दौरा

आज से तीन दिनों की इजरायल यात्रा पर हैं. पीएम मंगलवार शाम साढ़े 6 बजे इजरायल पहुंचेंगे. पीएम मोदी की इस ऐतिहासिक यात्रा पर पूरी दुनिया की नजरें हैं. यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला इजरायल दौरा है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू प्रोटोकॉल तोड़कर खुद एयरपोर्ट पर आकर पीएम मोदी का स्वागत करेंगे.

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खुफिया जानकारी जुटाने में सक्षम हेरोन टीपी

हेरोन टीपी ड्रोन मिसाइल से लैस होते हैं. इनकी तुलना अमेरिका के प्रिडेटर और रीपर ड्रोन से की जाती है. हेरोन टीपी ड्रोन इटियन के नाम से जाना जाता है, जो लगातार 30 घंटे की उड़ने की क्षमता रखता है. मिसाइल से लैस होने वाले हेरोन टीपी ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत खुफिया जानकारी इकट्ठा करना और जासूसी भी शामिल है.

भारत को 48 फीसदी हथियार निर्यात करता है इजरायल

इजरायल अपना 48 फीसदी हथियार भारत को निर्यात करता है, जिसमें अब और तेजी आएगी. भारत अभी 70 से 100 अरब रुपये के करीब सैन्य उत्पाद इजरायल से आयात कर रहा है, जो अगले पांच साल में 150 अरब रुपये तक पहुंच सकता है.

भारत के साथ कारोबारी रिश्ते

पीएम के इस दौरे से भारत में निवेश के बेहतर मौके बनेंगे. सबसे बड़ी बात यह कि इजरायल मोदी के दौरे के आसरे विरोधियों को यह जताना चाहता है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश ना केवल उसका अच्छा दोस्त है, बल्कि उसके साथ उसके व्यापक कारोबारी रिश्ते भी हैं.

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इजरायल में 17 हजार करोड़ का रक्षा सौदा होने की संभावना जताई जा रही है. इजरायल भारत की दोस्ती का इस्तेमाल मिडल-ईस्ट के साथ एशिया के अन्य देशों के साथ डिप्लोमेसी में कर सकता है.

 

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