एक बूढ़ा बाघ जब शिकार में असमर्थ हो गया तो वह सोने का कंगन दिखाकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था, बचपन में आपने पंचतंत्र की यह कहानी तो पढ़ी ही होगी. लेकिन जमाना बदलने के साथ बाघ भी अलग तरह से बरताव करने लगे हैं. बुजुर्ग होने वाले टाइगर जब शिकार करने में असमर्थ हो जाते हैं तो वे रिहायशी इलाकों का रुख कर आदमियों का शिकार करने लगते है.
कुछ ऐसा ही वाकया पीलीभीत टाइगर रिजर्व और आसपास के तराई इलाकों में देखने को लगातार मिल रहा है. इससे निबटने के लिए यूपी के वन विभाग ने आदमियों के लिए बने ओल्ड एज होम की तर्ज पर टाइगर के लिए ‘रेस्क्यू सेंटर’ खोलने की योजना तैयार की है.
यूपी में अपनी तरह का यह पहला सेंटर पीलीभीत में खोला जाएगा. जहां पर बुजुर्ग टाइगर को रखकर उनकी देखरेख की जाएगी. यहां इन बूढ़े टाइगर के खानेपीने के साथ ही उनके इलाज के भी पुख्ता इंतजाम होंगे. इसके लिए डाक्टरों का एक पैनल भी बनाया जाएगा. प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक –वन्य जीव एस. के. उपाध्याय बताते हैं ‘रेस्क्यू सेंटर को शु्रू करने के लिए 3.5 करोड़ रुपए की डिमांड भेजी गई है. इसमें कम से कम 15 टाइगर रखने की जगह होगी.’
आशीष मिश्र