किसने किए 40 करोड़ के बंगले के लिए दो कत्‍ल?

महाराष्ट्र के दो अहम शहरों पुणे और सतारा को जोड़ने वाले हाई-वे पर वैसे तो हमेशा ही भीड़ होती है. देश के मशहूर हिल स्टेशन खंडाला के करीब होने की वजह से यहां टूरिस्टों का आना-जाना भी लगा रहता है. लेकिन इसी तेज रफ्तार सड़क से सटे एक सुनसान और खंडरनुमा गोदाम में 30 अप्रैल 2013 को शाम करीब चार बजे एक शख्स ने जो कुछ देखा, उसने उसके रौंगटे खड़े कर दिए.

Advertisement

aajtak.in

  • पुणे/मुंबई,
  • 09 मई 2013,
  • अपडेटेड 2:52 AM IST

महाराष्ट्र के दो अहम शहरों पुणे और सतारा को जोड़ने वाले हाई-वे पर वैसे तो हमेशा ही भीड़ होती है. देश के मशहूर हिल स्टेशन खंडाला के करीब होने की वजह से यहां टूरिस्टों का आना-जाना भी लगा रहता है. लेकिन इसी तेज रफ्तार सड़क से सटे एक सुनसान और खंडरनुमा गोदाम में 30 अप्रैल 2013 को शाम करीब चार बजे एक शख्स ने जो कुछ देखा, उसने उसके रौंगटे खड़े कर दिए.

Advertisement

इस गोदाम में एक नहीं, बल्कि दो-दो लाशें पड़ी हैं और वो भी बुरी तरह जली हुई. किसी भी रिहायशी इलाके से दूर इस सुनसान जगह पर पड़ी ये लाशें आखिर किसकी हो सकती हैं? थोड़ा संभलने के बाद वो शख्स फौरान पुलिस को फोन करता है और अगले ही पल पुलिस मामले की तफ्तीश शुरू कर देती है. लाशों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया जाता है और उनके शिनाख्त की कोशिश शुरू हो जाती है.

90 फीसदी जली इन लाशों को देखकर मरनेवालों की पहचान नामुमकिन है, लेकिन डील-डौल और कपड़ों को देख कर पहली नजर में लाशें एक बुजुर्ग जोड़े की लगती हैं. पर किसकी? पुलिस आसपास के दूसरे थानों में भी इसकी खबर दे देती है. ताकि शायद कोई सुराग मिल जाए. और फिर जल्दी ही खंडाला पुलिस को एक अहम सुराग मिल ही जाता है. उसे पता चलता है कि पुणे के कोरेगांव पार्क पुलिस स्टेशन में एक बुजुर्ग शख्स और महिला के गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज है.

Advertisement

अब खंडाला पुलिस फौरन पुणे के कोरेगांव थाने में बात करती है और लाशों की शिनाख्त के लिए उस परिवार को बुलाया जाता है, जिन्होंने अपने घर के बुजुर्ग के गायब होने की रिपोर्ट लिखवाई है. और फिर जल्द ही पुलिस का शक यकीन में बदल जाता है. लाशें उन्हीं बुजुर्गों की हैं, जो पुणे से लापता हुए हैं. मरनेवालों की पहचान पुणे के 84 साल के अरबपति बिज़नेसमैन विनोद ब्रोकर और 54 साल की उनकी सेक्रेटरी उषा के तौर पर होती है.

छानबीन के दौरान ये बात साफ़ होती है कि ब्रोकर अपनी सेक्रेटरी के साथ 29 अप्रैल की सुबह से ही लपाता थे. दोनों कहां गए थे? दोनों इस हाई-वे तक कैसे पहुंचे? उनकी हत्या किसने की? और हत्या का मकसद क्या था? ये सभी सवाल अब भी बस सवाल ही थे. लिहाज़ा पुलिस अब आगे की जांच में जुट गई.

मुंबई के जुहू बीच पर मौजूद 40 करोड़ का बंगला
इधर बंगले की डील हुई और उधर बंगले के मालिक का क़त्ल हो गया. 84 साल के अरबपति रियल स्टेट कारोबारी के कत्ल की ये वारदात जितनी सनसनीखेज है, इसके पीछे की साजिश उतनी ही चौंकानेवाली? आखिर क्या है 40 करोड़ के बंगले का राज और कौन है क़ातिल?

Advertisement

पुणे-सतारा हाई-वे पर हुए डबल मर्डर के मामले में पुलिस को अब एक मुकाम मिल चुका था. कम-से-कम दो बुरी तरह जली इन लाशों से जुड़ा एक राज तो खुल ही चुका था. पुलिस ये जान चुकी थी कि मरनेवाले कौन हैं, कहां के रहनेवाले हैं. लेकिन सबसे अहम सवाल अब भी जस का तस था, वो ये कि आखिर दोनों का कत्ल किसने और क्यों किया?

लिहाजा, पुलिस ने दोनों मकतूल यानी 84 साल के अरबपति रियल स्टेट कारोबारी विनोद ब्रोकर और उनकी 54 साल की सेक्रेटरी उषा नायर के घरवालों से पूछताछ शुरू की. चूंकि कत्ल का दायरा पुणे से लेकर सतारा हाई-वे और खंडाला तक फैला हुआ था, लिहाजा इस मामले की जांच में कोरेगांव पुलिस और मुंबई क्राइम ब्रांच के अलावा पुलिस की और भी कई टीमों को लगा दिया गया.

तफ्तीश आगे बढ़ी, तो पता चला कि करोड़ों के मालिक बुजुर्ग बिजनेसमैन विनोद ब्रोकर इन दिनों अपनी एक प्रॉपर्टी की सौदेबाज़ी में लगे हुए थे. ये प्रॉपर्टी कहीं और नहीं, बल्कि मुंबई के सबसे पॉश इलाकों में से एक यानी जुहू बीच के करीब एक प्राइम लोकेशन पर थी. सदी के महानयक अमिताभ बच्चन समेत तमाम सेलिब्रिटीज़ के ठीक पड़ोस में मौजूद ये एक ऐसा बंगला था, जिसमें रहना किसी के लिए भी ख्वाब हो सकता था. लेकिन विनोद तकरीबन 8 एकड़ में फैले अपने इसी बंगले को बेचना चाहते थे और उन्होंने इसकी कीमत रखी थी, पूरे 40 करोड़ रुपये.

Advertisement

अब ऐसी हॉट प्रॉपर्टी के बिकाऊ होने की बात सुनकर विनोद के पास प्रॉपर्टी डीलरों का तांता लग गया. लेकिन सवाल ये था कि क्या क़ातिल इन्हीं प्रॉपर्टी डीलर्स में से कोई एक था? और क्या विनोद की हत्या इस प्रॉपर्टी की वजह से ही की गई? अगर हां, तो सवाल ये भी था कि फिर क़ातिलों ने उनकी सेक्रेटरी उषा नायर को अपना शिकार क्यों बनाया?

फिलहाल पुलिस के पास इन सवालों के सही-सही जवाब तो नहीं थे, लेकिन इतना ज़रूर शक हो चला था कि इस डबल मर्डर के पीछे प्रॉपर्टी का एंगल एक बड़ी वजह हो सकती है. अब पुलिस ने एक तरफ ब्रोकर और उसकी सेक्रेटरी के कॉल डिटेल्स को खंगालना शुरू किया, वहीं दूसरी तरफ़ आखिरी दिनों में विनोद ब्रोकर और उनकी सेक्रेटरी से मिलनेवाले लोगों की फेहरिस्त भी तैयार करने लगी. और इसी कड़ी में पुलिस को एक ऐसी बात पता चली कि उसके कान खड़े हो गए.

अब दोहरे कत्ल की ये कहानी तकरीबन साफ़ हो चुकी थी. कम से कम पुलिस को इतना तो पता चल ही गया था कि कत्ल के पीछे 40 करोड़ का बंगला ही सबसे बड़ी वजह है. लेकिन जब पुलिस के हाथ कातिलों तक पहुंचे और जब गुनहगारों ने पुलिस को कत्ल की पूरी कहानी सुनाई, तो कुछ देर के लिए वर्दीवाले भी ठिठक कर रह गए.

Advertisement

अमीर कारोबारी विनोद ब्रोकर पिछले 15 दिनों से बांद्रा के एक प्रॉपर्टी डीलर इब्राहिम शेख के संपर्क में थे. वही इब्राहिम शेख, जिसने चंद सालों में मुंबई और आस-पास के इलाकों में प्रॉपर्टी के कारोबार से करोड़ों रुपये बनाए थे और इस बार उसने खुद बुज़ुर्ग ब्रोकर से बात कर उनके जुहू के बंगले को खरीदने की ख्वाहिश जताई थी.

छानबीन आगे बढ़ी तो ये बात भी साफ हो गई कि गायब होने से पहले आखिरी बार विनोद ब्रोकर और उनकी सेक्रेटरी उषा नायर, इब्राहिम शेख के साथ ही देखे गए थे. ऐसे में पुलिस का शक शेख पर और गहरा हो गया. लिहाजा, उसने बिना देर किए बांद्रा के प्रॉपर्टी डीलर शेख को उठाने का फैसला किया. अब शेख पुलिस के कब्जे में था और तकरीबन पांच घंटे की पूछताछ के बाद इस सनसनीखेज डबल मर्डर की कहानी साफ हो चुकी थी.

शेख ने पुलिस को बताया कि जुहू के बंगले की खरीद के लिए जब उसने पहली बार बुजुर्ग कारोबारी ब्रोकर से बात की थी, तभी उसके मन में बंगले को खरीदने के बदले उस पर कब्जा करने का ख्याल आ चुका था. फिर उसने अपने साथी रवींद्र रेड्डी से बात की और फिर ब्रोकर को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया. इसके बाद दोनों कोरेगांव पार्क में ब्रोकर के घर पहुंचे और उन्हें 4 करोड़ रुपये एडवांस के तौर पर दिए. उस रोज तो दोनों वापस लौट गए, लेकिन यही वो दिन था जब दोनों ने ब्रोकर का कत्ल करने का फैसला कर लिया.

Advertisement

तकरीबन पंद्रह दिन बाद यानी 29 अप्रैल को दोनों डील फ़ाइनल करने के बहाने एक बार फिर कोरेगांव में उनके घर पहुंचे और उन्हें सतारा में अपनी एक प्रॉपर्टी पर इनवेस्ट करने का सब्जबाग दिखाकर अपने साथ चलने के लिए राजी कर लिया. ब्रोकर की सेक्रेटरी उषा नायर की किस्मत भी खराब थी. वो भी अपने मालिक के साथ नई प्रॉपर्टी देखने के लिए सतारा चल पड़ी. लेकिन रास्ते में जो कुछ हुआ, वो दहलानेवाला था.

पुणे-सतारा हाईवे पर एक सुनसान जगह पर दोनों ने अपने ड्राइवर नितिन भाटिया के साथ मिलकर विनोद ब्रोकर और उनकी सेक्रेटरी उशा नायर की गला घोंटकर हत्या कर दी और फिर पहचान छिपाने के इरादे से उन्हें आग के हवाले कर दिया. इसके बाद दोनों एक बार फिर पुणे लौटे और जुहू के बंगले से जुड़े बाकी के दस्तावेज़ लेकर मुंबई पहुंच गए. यहां उन्होंने अदालत में विनोद ब्रोकर के हुलिए से मेल खाते एक बुजुर्ग को ब्रोकर बता कर जुहू के बंगले को अपने नाम पर करवाने की कवायद शुरू कर दी.

लेकिन शेख के तमाम एहतियात के बावजूद पुलिस को उसके काले करतूत की भनक लग ही गई और पुलिस ने पहले शेख को और फिर उसके साथी रवींद्र रेड्डी को धर दबोचा. छानबीन के दौरान साफ हुआ कि उनका ड्राइवर नितिन भाटिया भी उनके साथ इस साज़िश में शामिल था. और तो और बुजुर्ग ब्रोकर और उनकी सेक्रेटरी के कत्ल के बाद भाटिया ने ब्रोकर की कार चुरा कर उसे भी आगे किसी को बेच दिया था. लेकिन दो-दो कत्ल के बाद रातों-रात जुहू में एक आलीशान बंगले का मालिक बनने का ख्वाब देखनेवाले शेख और रेड्डी आखिरकार सलाखों के पीछे पहुंच गए.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement