MOTN: चीन की धोखेबाजी से खफा देश का जनमत, 59 फीसदी बोले युद्ध करना चाहिए

जब आजतक ने लोगों से पूछा कि क्या भारत युद्ध में चीन से जीत सकता है. तो बंपर बहुमत के साथ 72 फीसदी लोगों ने कहा कि हां भारत युद्ध में चीन को हरा देगा. जबकि मात्र 9 फीसदी मानते हैं कि हम चीन को हरा नहीं सकते हैं.

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MOTN में चीन के खिलाफ देश का जनमत (फोटो- पीटीआई) MOTN में चीन के खिलाफ देश का जनमत (फोटो- पीटीआई)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 9:18 PM IST

  • धोखे पर 59 % लोग चीन से युद्ध के पक्ष में
  • 72 फीसदी को यकीन, चीन को देंगे शिकस्त
  • 84 फीसदी लोगों को चीन पर भरोसा नहीं

15 जून को लद्दाख के गलवान घाटी में चीन की धोखेबाजी पर बीजिंग के खिलाफ देश का मूड उबल पड़ा था. 20 भारतीय सैनिकों की शहादत ने चीन के खिलाफ लोगों में आक्रोश भर दिया था. चीनी विश्वासघात पर आज तक ने देश का मिजाज (MOTN) टटोलने की कोशिश की. मूड ऑफ द नेशन के नाम से किए गए इस सर्वे में 59 फीसदी लोग मानते हैं कि सीमा विवाद पर भारत को चीन के साथ युद्ध करना चाहिए.

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आजतक ने लोगों से पूछा कि क्या सीमा विवाद पर भारत को चीन से युद्ध करना चाहिए? इसके जवाब में 59 फीसदी लोगों ने हां में जवाब दिया, जबकि 34 फीसदी युद्ध के पक्ष में नहीं है. 7 फीसदी लोगों ने कहा कि इस बारे में वो कोई राय नहीं दे सकते हैं.

चीन से जीत जाएंगे जंग?

जब आजतक ने लोगों से पूछा कि क्या भारत युद्ध में चीन से जीत सकता है. तो बंपर बहुमत के साथ 72 फीसदी लोगों ने कहा कि हां भारत युद्ध में चीन को हरा देगा. जबकि मात्र 9 फीसदी मानते हैं कि हम चीन को हरा नहीं सकते हैं. 10 फीसदी लोग मानते हैं कि ये युद्ध गतिरोध पर खत्म होगा. जबकि 10 फीसदी लोग ने कहा कि वे इस बारे में कोई राय नहीं दे सकते हैं.

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सर्वे में के दौरान हमने लोगों ने पूछा कि क्या भारत को चीन पर भरोसा करना चाहिए? तो मात्र 9 फीसदी लोगों ने कहा कि हमें चीन पर भरोसा पर करना चाहिए, जबकि 84 फीसदी कहते हैं कि भारत को चीन पर भरोसा नहीं करना चाहिए. 7 फीसदी लोगों ने इस बारे में कोई राय नहीं दी है.

कैसे किया गया सर्वे?

आजतक के लिए ये सर्वे कर्वी इनसाइट्स लिमिटेड ने किया जिसमें 12 हजार 21 लोगों से बात की गई. इनमें से 67 फीसदी ग्रामीण जबकि शेष 33 फीसदी शहरी लोग थे. 19 राज्यों की कुल 97 लोकसभा और 194 विधानसभा सीटों के लोग सर्वे में शामिल किए गए. जिन 19 राज्यों में ये सर्वे किया गया उनमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. ये सर्वे 15 जुलाई से 27 जुलाई के बीच किया गया.

सर्वे में 52 फीसदी पुरुष, 48 फीसदी महिलाएं शामिल थीं. अगर धर्म के नजरिए से देखा जाए तो 86 फीसदी हिंदू, 9 फीसदी मुस्लिम और पांच फीसदी अन्य धर्मों के लोगों से उनकी राय जानी गई. जिन लोगों पर सर्वे किया गया उनमें 30 फीसदी सवर्ण, 25 फीसदी एससी-एसटी व 44 फीसदी अन्य पिछड़े वर्ग के लोग शामिल थे. सर्वे में शामिल 57 फीसदी लोग 10 हजार रुपये महीने से कम की आमदनी वाले थे जबकि 28 फीसदी 10 से 20 हजार रुपये और 15 फीसदी 20 हजार रुपये महीने से ज्यादा कमाने वाले लोग थे. सर्वे के सैंपल में किसान, नौकरीपेशा, बेरोजगार, व्यापारी, छात्र आदि को शामिल किया गया था.

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