चमत्कार से कम नहीं है 27वें हफ्ते में जन्मी इस बच्ची की कहानी

दिल को छू लेने वाली ये तस्वीर उस वक्त की है जब ये नन्हीं सी बच्ची महज 25 दिन की थी. पहली बार उसके पिता ने उसे गोद में उठाया था.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2015,
  • अपडेटेड 11:01 PM IST

दिल को छू लेने वाली ये तस्वीर उस वक्त की है जब ये नन्हीं सी बच्ची महज 25 दिन की थी. पहली बार उसके पिता ने उसे गोद में उठाया था. तस्वीर देखकर आप इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि बच्ची कितनी छोटी रही होगी. पिता की वेडिंग रिंग भी उसके हाथ में कितनी बड़ी लग रही है.

मॉली पेरिन का जन्म 27 अप्रैल को हुआ था. 27वें हफ्ते में ही पैदा हो जाने वाली पेरिन का अभी जन्म भी नहीं हुआ था तभी डॉक्टरों ने ये बता दिया था कि बच्ची placental disorder से पीड़ित है. डॉक्टरों ने दुखी मां-बाप स्टेफनी और जेम्स को पहले ही कह दिया था कि जन्म के बाद ये बच्ची तीन सप्ताह से अधिक जिंदा नहीं रह सकेगी.


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लेकिन मॉली की इच्छाशक्त‍ि ने डॉक्टरों को गलत साबित कर दिया. तीन हफ्ते बाद वो अपने माता-पिता की गोद में थी और आज वो 17 हफ्ते की है. पूर्व यॉर्कशायर में रहने वाला ये परिवार अब अपनी बच्ची को घर ले जाने की तैयारी कर रहा है.

डेली मेल में प्रका‍शि‍त खबर के अनुसार, जेम्स का कहना है कि उन्हें और उनकी पत्नी को तो अब तक इस बात पर यकीन नहीं हो पा रहा है कि वो अपनी बेटी को घर ले जा रहे हैं. उनका कहना है कि मॉली को घर ले जाने की जो खुशी है उसे वे शब्दों में बयान नहीं कर सकते हैं.

वो बताते हैं कि जब पहली बार डॉक्टर ने उन्हें मॉली की हालत के बारे में बताया था तो टूट गए थे. दरअसल, placental disorder के चलते गर्भ में मॉली का विकास बेहद धीमा था. 27 अप्रैल को सी-सेक्शन से उसकी डिलीवरी हुई. जिसके बाद स्टेफनी को भी दो हफ्ते तक अस्पताल में ही रहना पड़ा.

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अस्पताल में हर रोज मॉली का अल्ट्रासाउंड और स्कैन किया जाता था और ये जानने की कोशिश की जाती थी कि वो जिंदा है या नहीं. मॉली का जब जन्म हुआ था तो वह लगभग आधे किलोग्राम की थी. अगले सप्ताह वो अपने माता-पिता के साथ पहली बार अपने घर जाएगी.

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