घर से भागे बच्चों का पता लगाने के लिए ट्रेनों पर रखें नजर: मेनका गांधी

घर से भाग जाने वाले बच्चों की समस्या से निपटने के लिए महिला एवं बाल कल्याण विकास मंत्रालय ने एक नया रास्ता निकाला है. घर से भागने वाले अधिकतर बच्चे बड़े शहरों की ओर जाने वाली ट्रेन पकड़ लेते हैं इसलिए मंत्रालय ने इन बच्चों से जुड़ी समस्या के संदर्भ में रेलवे से मदद मांगी है.

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मेनका गांधी मेनका गांधी

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 नवंबर 2014,
  • अपडेटेड 3:01 PM IST

घर से भाग जाने वाले बच्चों की समस्या से निपटने के लिए महिला एवं बाल कल्याण विकास मंत्रालय ने एक नया रास्ता निकाला है. घर से भागने वाले अधिकतर बच्चे बड़े शहरों की ओर जाने वाली ट्रेन पकड़ लेते हैं इसलिए मंत्रालय ने इन बच्चों से जुड़ी समस्या के संदर्भ में रेलवे से मदद मांगी है.

महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि यात्री टिकट जांचकर्ताओं (टीटीई) को ज्यादा चौकस रहना चाहिए क्योंकि ये बच्चे घर छोड़ने के बाद मुंबई, कोलकाता और दिल्ली जैसे बड़े शहरों की ओर जाने वाली ट्रेनें पकड़ लेते हैं.

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उन्होंने कहा, ‘ये बच्चे अधिकतर आठ साल से ज्यादा उम्र के होते हैं और ये ट्रेनों से आते हैं. ऐसा कैसे संभव है कि टीटीई बिना टिकट के यात्री, डिब्बे में इधर-उधर घूम रहे बच्चे पर गौर ही न कर पाए? आखिरकर बच्चा कोई सामान तो है नहीं और न ही वह सीट के नीचे छिपता है.’

उन्होंने हाल की ही उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि घरों से भागकर आने वाले लगभग 700 बच्चे हर माह दिल्ली के स्टेशनों पर पहुंचते हैं. रिपोर्ट का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, ‘यह एक महामारी है.’ मंत्री ने हाल की एक बैठक में रेलवे अधिकारियों से कहा था कि वे रेलवे स्टेशनों पर पीसीओ बूथ लगाएं ताकि बच्चे परेशानी की स्थिति में बच्चों के हेल्पलाइन नंबर 1098 पर संपर्क कर सकें.

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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, साल 2011 से लगभग 60 हजार बच्चे लापता हैं. बचपन बचाओ आंदोलन की एक रिपोर्ट के अनुसार, हर घंटे लगभग 11 बच्चे गायब होते हैं और उनमें से कम से कम चार तो कभी नहीं मिलते. बचपन बचाओ आंदोलन के अनुसार, लापता बच्चों की संख्या प्रतिवर्ष 90 हजार तक भी हो सकती है.

-इनपुट भाषा से

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