कोटा में बच्चों की मौत के बाद राजस्थान हाई कोर्ट एक्शन में है. चीफ जस्टिस इंद्रजीत महांति और जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी की खंडपीठ ने गहलोत सरकार से कोटा समेत राज्य के सभी जिलों के नवजातों की मौत के कारण की रिपोर्ट तलब की है. इसके साथ ही जिला अस्पतालों को कम्प्यूटराइज्ड करने का निर्देश दिया गया है. न्यायमित्र राजवेंद्र सारस्वत और अतिरिक्त महाधिवक्ता पंकज शर्मा को किन्हीं दो अस्पतालों का औचक निरीक्षण करने का आदेश दिया गया है.
हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में सभी रिक्त पदों और स्वीकृत पदों की रिपोर्ट तलब की है. इस मामले में दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस इंद्रजीत महांति और जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी की बेंच ने सुनवाई की. सुनवाई के दौरान न्यायमित्र राजवेंद्र सारस्वत ने जनता का पक्ष रखा. इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को होगी.
बता दें, राजस्थान के कोटा के जेके लोन अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. सोमवार को दो और बच्चों ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद मौत का आंकड़ा 112 पहुंच गया है. जेके लोन अस्पताल के उप अधीक्षक डॉक्टर गोपी किशन शर्मा ने कहा कि मरने वाले में से एक बच्चे का नाम अजहर है. वह सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित था. उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. उन्होंने कहा कि बच्चे के घरवाले बिना डॉक्टर्स की सलाह पर उसे अस्पताल से ले गए.
100 से ज्यादा बच्चों की मौत के बाद सरकार ने जांच पैनल नियुक्त किया था. विशेषज्ञों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान असंतुलित हो जाना) के कारण बच्चों की मौत हुई. साथ ही बताया गया कि अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी भी इसकी वजह हो सकती है.
शरत कुमार