किरण बेदी का केजरीवाल को कानूनी नोटिस, नामांकन रद्द करने की मांग

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी अब खुलकर AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल पर 'हमले' कर रहे हैं. उन्होंने बिना इजाजत अपनी तस्वीर के इस्तेमाल पर केजरीवाल को कानूनी नोटिस भेज दिया है. इतना ही नहीं, उन्होंने केजरीवाल के नामांकन और नई दिल्ली में घर न होने को लेकर भी चुनाव आयोग में शिकायत की और उनका पर्चा रद्द करने की मांग की.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 जनवरी 2015,
  • अपडेटेड 6:24 PM IST

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी अब खुलकर AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल पर 'हमले' कर रहे हैं. उन्होंने बिना इजाजत अपनी तस्वीर के इस्तेमाल पर केजरीवाल को कानूनी नोटिस भेज दिया है. इतना ही नहीं, उन्होंने केजरीवाल के नामांकन और नई दिल्ली में घर न होने को लेकर भी चुनाव आयोग में शिकायत की और उनका पर्चा रद्द करने की मांग की. नई दिल्ली से कांग्रेस उम्मीदवार किरण वालिया भी केजरीवाल का नामांकन रद्द करने की मांग कर चुकी हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने उनकी मांग ठुकरा दी थी.

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गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी ने हाल ही में कई ऑटो के पीछे पोस्टर लगाए थे जिनमें किरण बेदी को 'अवसरवादी' बताया गया था. किरण बेदी ने बिना इजाजत अपनी तस्वीर के इस्तेमाल से खफा होकर केजरीवाल को कानूनी नोटिस भेज दिया है. वहीं बीजेपी ओबामा दौरे का भी चुनावी फायदा लेने से नहीं चूक रही. हाल ही में चुनाव प्रचार के दौरान किरण बेदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दौरे का भी जिक्र किया, जिस पर कांग्रेस ने विरोध जताया है.

कांग्रेस नेता बरखा सिंह ने कहा कि बराक ओबामा किसी पार्टी के लिए नहीं, पूरे देश के लिए भारत आए हैं और कोई पार्टी उनके नाम से अपना प्रचार नहीं कर सकती. वहीं किरण बेदी के नोटिस को AAP ने गंभीरता से नहीं लिया है. AAP नेता संजना सिंह ने कहा, 'बीजेपी में जाते ही किरण बेदी को नोटिस का मसला समझ आने लगा. लीगल नोटिस इनकी परंपरा बन गई है, कभी नितिन गडकरी भेजते हैं, कभी कोई. किरण बेदी इसी का निर्वहन कर रही हैं.'

संजना सिंह ने कहा कि बीजेपी अपने सोशल मीडिया के मंचों पर अरविंद केजरीवाल की तस्वीर का खूब इस्तेमाल करती है, किरण बेदी पहले इसका जवाब दें. उन्होंने कहा, 'उनके नोटिस का हम जवाब देंगे और इन लीगल नोटिस के चक्कर में नहीं पड़ते. ये अवसरवादिता ही है और कड़वे सच को स्वीकार करना चाहिए.'

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