जुलाई में थोक महंगाई और गिरकर हुई -4.05 फीसदी

प्रति माह आने वाले थोक कीमत सूचकांक के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में वार्षिक महंगाई दर पिछले साल की जुलाई के मुकाबले -4.05 फीसदी रही. जानकारों के मुताबिक अब बैंकों के ऊपर ब्याज दरों में कटौती करने का दबाव बढ़ जाएगा.

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File Image: दिल्ली के मॉ़ल में वेजिटेबल काउंटर File Image: दिल्ली के मॉ़ल में वेजिटेबल काउंटर

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 अगस्त 2015,
  • अपडेटेड 1:22 PM IST

प्रति माह आने वाले थोक कीमत सूचकांक के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में वार्षिक महंगाई दर पिछले साल की जुलाई के मुकाबले -4.05 फीसदी रही. वहीं पिछले महीने महंगाई दर -2.40 फीसदी पर थी जिबकि पिछले साल जून में यह 5.41 फीसदी थी. जानकारों के मुताबिक अब बैंकों के ऊपर ब्याज दरों में कटौती करने का दबाव बढ़ जाएगा.

सेंट्रल कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्रालय के शुक्रवार को जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक जुलाई माह में थोक कीमत सूचकांक (WPI) में 0.6 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है. मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक जून में थोक सूचकांक 178.6 के स्तर से कम होकर जुलाई में 177.5 हो गई है.

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सब्जियों की महंगाई दर घटकर -24.52 फीसदी हुई
जुलाई में फ्यूल, पावर ग्रुप की महंगाई दर -10.03 फीसदी से घटकर -12.81 फीसदी हुई है तो सब्जियों की महंगाई दर -7.07 फीसदी से घटकर -24.52 फीसदी हो गई है.

इसके साथ ही खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर में भी गिरावट देखने को मिल रही है. माह दर माह आधार पर जुलाई में खाद्य महंगाई दर 2.88 फीसदी से घटकर -1.16 फीसदी हो गई है. इसके अलावा नॉन-फूड आर्टिकल्स की महंगाई दर 1.06 फीसदी से घटकर -0.74 फीसदी हो गई है.

मैन्यूफैक्चरिंग महंगाई दर घटकर हुई -1.47 फीसदी
आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर -0.76 फीसदी से घटकर -3.66 फीसदी हो गई. वहीं मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट की महंगाई दर -0.77 फीसदी से घटकर -1.47 फीसदी रह गई है.

ब्याज दरों में कटौती का बढ़ा दबाव
गौरतलब है कि खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में अपने रिकॉर्ड निम्न स्तर पर पहुंच गई और अगस्त में इसमें और गिरावट आने की संभावना है. प्रमुख ब्रोकरेज कंपनियां पहले से यह बात कह रही थी और उम्मीद जता रही हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक सितंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में मुख्य दर में 0.25 फीसदी की कटौती करेगा. जानकारों का यह भी कहना है कि अब बैंकों के ऊपर ब्याज दरों में कटौती करने का दबाव बढ़ता दिखाई देगा.

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