जालनाः लोकसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा, विधानसभा में त्रिकोणीय मुकाबला

जालना लंबे समय तक औरंगाबाद जिले का हिस्सा रहा, लेकिन 1 मई 1981 को औरंगाबाद से अलग कर जालना जिले का निर्माण किया गया. जालना जिले की सीमा पूर्व में परभणी और बुलढाणा से, पश्चिम में औरंगाबाद, उत्तर में जलगांव और दक्षिण में बीड से घिरा है.

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जालना शहर का एक दृश्य जालना शहर का एक दृश्य

aajtak.in

  • जालना ,
  • 09 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 3:34 PM IST

  • जालना में हिंदुओं की आबादी 77 फीसदी
  • दूसरे व तीसरे नंबर पर मुसलमान और बौद्ध

जालना जिला महाराष्ट्र के मध्य में स्थित है और यह मराठवाड़ा क्षेत्र में आता है. एक समय में यह जिला निजाम के अधीन हुआ करता था और मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम के बाद, औरंगाबाद जिले की तहसील के रूप में यह भारत का हिस्सा बन गया.

जालना लंबे समय तक औरंगाबाद जिले का हिस्सा रहा, लेकिन 1 मई 1981 को औरंगाबाद जिले से अलग कर जालना जिले का निर्माण किया गया. जालना जिले की सीमा पूर्व में परभणी और बुलढाणा से, पश्चिम में औरंगाबाद, उत्तर में जलगांव और दक्षिण में बीड से घिरा है.

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साक्षरता दर 71.52 फीसदी

जालना जिले में 7,612 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र शामिल है, जो कुल राज्य क्षेत्र का 2.47% है. 2011 की जनगणना के आधार पर जालना जिले की आबादी 19,59,046 थी जिसमें 10,11,473 पुरुष और 9,47,573 महिलाएं हैं. 2001 की जनगणना के अनुसार इस जिले की आबादी 16,12,980 थी. महाराष्ट्र की कुल आबादी के आधार पर 1.74 फीसदी आबादी जालना में रहती है.

जालना जिले की साक्षरता दर 71.52 फीसदी है जिसमें 81.53 फीसदी पुरुष तो 60.95 फीसदी महिलाएं साक्षर हैं. लिंगानुपात की बात करें तो 2011 की जनगणना के मुताबिक प्रति हजार पुरुषों में 937 महिलाएं हैं जबकि 2001 की जनगणना में यह दर 951 थी.

धर्म के आधार पर देखें तो इस जिले में 76.80 फीसदी जनता हिंदू धर्म को मानने वाली है जबकि 14 फीसदी आबादी मुसलमानों और 7.79 फीसदी बौद्ध धर्म के लोगों की है.

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जालना संसदीय क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें पैठण और जालना सीट पर शिवसेना का कब्जा है. जबकि बदनापुर, भोकरदन, फुलंब्री विधानसभा सीटों पर बीजेपी और सिल्लोड में कांग्रेस के विधायक हैं.

जालना लोकसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा

जालना लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के रावसाहेब दादाराव दानवे सांसद हैं. उन्होंने इस साल हुए चुनाव में कांग्रेस के विलास केशवराव औताडे को 3,32,815 मतों के अंतर से हराया था. चुनाव में दानवे को 6,98,019 वोट जबकि के विलास केशवराव को 3,65,204 वोट मिले. 2014 के चुनाव में भी रावसाहेब दादाराव दानवे ने जीत हासिल की थी.

फिलहाल हरियाणा के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी विधानसभा चुनाव कराए जा रहे हैं. दोनों ही राज्यों में 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे जबकि 24 अक्टूबर को चुनाव के नतीजे आएंगे.

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