राहुल के ट्वीट पर बोले रविशंकर- डेटा को हथियार बनाते रंगे हाथ पकड़े गए, हमपर सवाल उठा रहे

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि चुनाव से पहले डेटा को हथियार बनाते हुए आप रंगे हाथ पकड़े गए थे. कैंब्रिज एनालिटिका, फेसबुक से आपका गठजोड़ पकड़ा गया था. ऐसे लोग आज बेशर्मी से सवाल खड़े करते हैं.

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केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद (फाइल फोटो) केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 8:11 PM IST

  • केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी के ट्वीट पर किया पलटवार
  • 'चुनाव से पहले डेटा को हथियार बनाते हुए आप रंगे हाथ पकड़े गए थे'

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के ट्वीट पर पलटवार किया है. रविशंकर प्रसाद ने कहा, चुनाव से पहले डेटा को हथियार बनाते हुए आप रंगे हाथ पकड़े गए थे. कैंब्रिज एनालिटिका, फेसबुक से आपका गठजोड़ पकड़ा गया था. ऐसे लोग आज बेशर्मी से सवाल खड़े करते हैं.

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दरअसल, राहुल गांधी ने रविवार को फेसबुक और वॉट्सऐप को लेकर एक ट्वीट किया. राहुल गांधी ने एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधा. राहुल गांधी ने ट्वीट किया, बीजेपी और आरएसएस का भारत में फेसबुक और वॉट्सऐप पर कब्जा है. वे इसके जरिये फेक न्यूज और नफरत फैलाने का काम करते हैं. वे इसका इस्तेमाल मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए करते हैं.

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राहुल गांधी के इसी ट्वीट पर अब रविशंकर प्रसाद ने पलटवार किया है. रविशंकर प्रसाद ने अपने ट्वीट में लिखा, वो कहते रहते हैं कि पूरी दुनिया BJP, RSS से नियंत्रित है. चुनाव से पहले डेटा को हथियार बनाते हुए आप रंगे हाथ पकड़े गए थे. कैंब्रिज एनालिटिका, फेसबुक से आपका गठजोड़ पकड़ा गया. ऐसे लोग आज बेशर्मी से सवाल खड़े करते हैं.

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रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा, तथ्य यह है कि आज सूचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है. यह अब आपके परिवार द्वारा नियंत्रित नहीं किया जाता है और इसीलिए आपको दुख होता है. खैर आपने बेंगलुरु हिंसा की निंदा नहीं की. आपकी हिम्मत कहां चली गई.

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क्या है पूरा मामला

दरअसल, ये पूरी विवाद अमेरिका के समाचार पत्र वॉल स्ट्रीट जनरल की एक रिपोर्ट से शुरू होता है. रिपोर्ट में कहा गया, बीजेपी के नेता टी.राजा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में कहा था कि रोहिंग्या मुसलमानों को गोली मार देनी चाहिए. मुस्लिमों को देशद्रोही बताया था और मस्जिद गिराने की भी धमकी दी थी. इसका विरोध फेसबुक की कर्मचारी ने किया था और इसे कंपनी के नियमों के खिलाफ माना था. हालांकि, कंपनी ने इस पर कोई एक्शन नहीं लिया था. अब फेसबुक की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं.

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