अमेरिकी आध्यात्मि‍क गुरु ने भारतीय संस्कृति को भविष्य की संस्कृति बताया

तीर्थ नगरी हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में गुरुवार से पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग, संस्कृति एवं अध्यात्म महोत्सव शुरू हो गया है. महोत्सव में अमेरिका के आध्यामिक गुरू एवं गांधी पुरस्कार से सम्मानित समाज सुधारक पैट्रिक मैक्यूलम ने कहा कि भारतीय संस्कृति ही भविष्य की संस्कृति है.

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aajtak.in

  • हरिद्वार,
  • 03 अक्टूबर 2014,
  • अपडेटेड 12:25 AM IST

तीर्थ नगरी हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में गुरुवार से पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग, संस्कृति एवं अध्यात्म महोत्सव शुरू हो गया है. महोत्सव में अमेरिका के आध्यामिक गुरू एवं गांधी पुरस्कार से सम्मानित समाज सुधारक पैट्रिक मैक्यूलम ने कहा कि भारतीय संस्कृति ही भविष्य की संस्कृति है. मैक्यूलम ने भारतीय योग, संस्कृति और अध्यात्म की खासियतों पर कहा कि ये तीनों वैयक्तिक धर्म ही नहीं, समूह धर्म व वैश्विक धर्म की स्थापना करने वाले आधार रूप हैं. निश्चय ही यदि कभी वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक उत्थान होगा तो उसकी प्रेरणाओं के मूल में यही संस्कृति होगी.

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छह अक्टूबर तक चलने वाले इस महोत्सव का देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने दीप जलाकर शुभारंभ किया. इस अवसर पर अनेक गण्यमान्य एवं विदेशों से आए 200 योग विशेषज्ञों, प्रशिक्षु व विवि के समस्त आचार्य, विद्यार्थी मौजूद थे.

महोत्सव में डॉ. पण्ड्या ने कहा कि योग, संस्कृति और अध्यात्म जहां व्यक्तिगत जीवन को ऊंचा उठाने और महानता की ओर अग्रसर करने में महान योगदान देते हैं, वहीं राष्ट्र की प्रगति और समुन्नति में भी इन माध्यमों की प्रशंसनीय भूमिका रहती है. उन्होंने कहा कि व्यक्ति, परिवार और समाज उत्थान की धुरी योग, संस्कृति और अध्यात्म है. पर खेद है कि इनकी महत्ता को आज भुला दिया गया है. भोगवादी विचारधाराओं में जन मानस डूबता जा रहा है.

महोत्सव में मुद्रा विज्ञान विशेषज्ञ स्वामिनी काली ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में हालांकि काफी प्रगति हुई है, वैज्ञानिक आविष्कार तमाम सुख सुविधाओं के संसाधन खड़े किए हैं, फिर भी कहना होगा कि मनुष्य नैतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से काफी पिछड़ गया और दिग्भ्रमित हो गया है. उसे सही दिशा और मार्गदर्शन की जरूरत है.

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