प्रत्यर्पण के खिलाफ ब्रिटिश SC पहुंचा माल्या, मांगी याचिका दायर करने की अनुमति

पिछले महीने लंदन हाईकोर्ट के फैसले से विजय माल्या को भारत भेजे जाने का रास्ता साफ हो गया था. हालांकि हाईकोर्ट के फैसले के बाद माल्या ने कहा था, कि मैं स्वाभाविक रूप से इस फैसले से निराश हूं. मैं अपने वकील की सलाह पर आगे भी कानूनी प्रकिया जारी रखूंगा.

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भगोड़ा कारोबारी विजय माल्या (फाइल-पीटीआई) भगोड़ा कारोबारी विजय माल्या (फाइल-पीटीआई)

मुनीष पांडे

  • नई दिल्ली,
  • 04 मई 2020,
  • अपडेटेड 11:45 PM IST

  • हाईकोर्ट ने की थी प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका खारिज
  • माल्या पर धोखाधड़ी-मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित केस दर्ज
  • जवाब के लिए 14 मई तक का वक्तः प्रॉसिक्यूशन सर्विस

देश के चर्चित भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने आज सोमवार को भारत प्रत्यर्पण के आदेश के खिलाफ ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की इजाजत मांगी है. पिछले महीने विजय माल्या के प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका लंदन के हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी. बता दें कि माल्या पर भारत में धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित केस दर्ज हैं.

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64 वर्षीय विजय माल्या के पास लंदन हाईकोर्ट से आदेश आने के बाद ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट में याचिका की इजाजत लेने के लिए 14 दिन का समय था. हाईकोर्ट ने पिछले महीने 20 अप्रैल को अपना फैसला सुनाया था. माल्या ने लोअर कोर्ट वेस्टमिनस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के प्रत्यर्पण के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

प्रत्यर्पण के मामले में भारतीय जांच एजेंसियों का प्रतिनिधित्व कर रही यूके क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के प्रवक्ता ने भी विजय माल्या की तरफ से याचिका मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि याचिका दायर कर दी गई है. जवाब के लिए हमारे पास 14 मई तक का वक्त है.

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इससे पहले लंदन हाईकोर्ट के फैसले से पिछले महीने विजय माल्या को भारत भेजे जाने का रास्ता साफ हो गया था. हालांकि हाईकोर्ट के फैसले के बाद माल्या ने कहा था, 'मैं स्वाभाविक रूप से इस फैसले से निराश हूं. मैं अपने वकील की सलाह पर आगे भी कानूनी प्रकिया जारी रखूंगा.'

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इसके साथ ही माल्या ने यह भी कहा था, 'मैं मीडिया नैरेटिव से भी निराश हूं जिसमें कहा गया कि मुझे 9,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मुकदमे का जरूर सामना करना चाहिए.'

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हजारों करोड़ रुपये की हेराफेरी कर भारतीय बैंकों को चूना लगाने वाला विजय माल्या भारत नहीं आने की जुगाड़ में लगा है. हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद 'आजतक' को जानकारी मिली थी कि क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) के मार्क्स समर्स ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को बताया था कि बहुत कम संभावना है कि ब्रिटेन की सुप्रीम कोर्ट माल्या की अपील को स्वीकार करे.

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सूत्रों का कहना था कि लंदन में सुप्रीम कोर्ट केवल संवैधानिक मामलों को देखता है और सुप्रीम कोर्ट के लिए प्रत्यर्पण से जुड़े मुद्दे को सुनना आम बात नहीं है. इसी कारण से जब बुकी संजीव चावला को भारत में प्रत्यर्पित किया जा रहा था, तो उनके पास सुप्रीम कोर्ट के सामने अपील करने का कोई विकल्प नहीं था.

हालांकि, विजय माल्या ने 14 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आवेदन दायर कर दिया है, अगर सुप्रीम कोर्ट उनकी याचिका को स्वीकार नहीं करता है, तो 28 दिनों के भीतर गृह सचिव को प्रत्यर्पण पत्रों पर हस्ताक्षर करना होगा. बाद में यूके के अधिकारियों के साथ समन्वय में माल्या को भारत भेजा जा सकेगा.

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लंदन हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि विजय माल्या ने भारतीय बैंकों को धोखा दिया है और उसे भारत में प्रत्यर्पित किया जाना चाहिए. माल्या पर भारतीय बैंकों को 11,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगाने का आरोप है.

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