चीनी अखबार का दावा- विदेशी मीडिया ने बढ़ाई भारत-चीन के बीच तल्खियां

आर्टिकल में कहा गया है, ‘हमेशा की तरह विदेशी मीडिया दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और उपलब्धियों को भूल उनके हिमालय और सैन्य शक्ति के लिए तथा सीमा विवाद को ज्यादा बढ़ा-चढ़ा कर दिखा रहे हैं.

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चीन के अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने भारत-चीन के बीच तनाव के लिए विदेशी मीडिया को दोषी ठहराया है चीन के अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने भारत-चीन के बीच तनाव के लिए विदेशी मीडिया को दोषी ठहराया है

अंजलि कर्मकार

  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2016,
  • अपडेटेड 4:34 PM IST

चीन के अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने भारत और चीन के बीच बढ़ती तल्खियों के लिए विदेशी मीडिया को जिम्मेदार ठहराया है. 'ग्लोबल टाइम्स' में छपे एक आर्टिकल में ये आरोप लगाए गए हैं. आर्टिकल में कहा गया है कि चीन की ओर से हिंद महासागर को साधने के लिए दक्षिण चीन सागर को सुरक्षित करने का काम शुरू किया गया है.

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आर्टिकल में कहा गया है, ‘हमेशा की तरह दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और उपलब्धियों को भूल उनके हिमालय और सैन्य शक्ति के लिए तथा सीमा विवाद को ज्यादा बढ़ा-चढ़ा कर दिखा रहे हैं.' इससे दोनों देशों के बीच आपसी मनमुटाव और तल्खियां बढ़ती जा रही है, जो आने वाले दिनों में दोनों देशों के लिए खतरनाक है.

दक्षिण चीन सागर पर सैन्य टकराव के आसार
के आर्टिकल के मुताबिक, ऐसा लगता है कि ये चीन के ‘बेल्ट एंड रोड’ (बी एंड आर) के लिए किए गए पहल में भारत का पूरा समर्थन पाना चाहते हैं. इसमें पहले भारत की निंदा और बाद में इसकी प्रशंसा की गई है. एक बेल्ट और एक रोड की पहल चीन को एशिया और यूरोप से जोड़ने की कोशिश है. तीन दिन पहले अखबार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चीन के इस कदम के लिए बदले हुए भारतीय रवैये के लिए आरोप लगाया था.

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सिल्क रोड के पीछे जियोस्ट्रैटजिक डिजाइन
ग्लोबल टाइम्स ने कहा, ‘भारतीय रणनीतिकारों और सरकार का मानना है कि (सिल्क रोड) के पीछे कुछ जियोस्ट्रैटजिक डिजाइन है. अब भारत ने इस पहल के विभिन्न हिस्सों में विरोध और देरी करना शुरू किया है. आर्टिकल के मुताबिक, बी एंड आर भारत-चीन के बीच प्रभावी प्लेटफॉर्म होगा. सिल्क रोड के अलावा चीन के बी एंड आर योजना में चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (सीपीइसी) भी शामिल है. बीजिंग में पिछले साल विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा, ‘भारत ने इस पर आपत्ति जताई है और सिल्क रोड के लिए भी भारत ने पूरा समर्थन नहीं जताया है, लेकिन जहां दो देशों की सहक्रियता होगी वहां इसका समर्थन होगा.‘

एनएसजी में भारत की नो एंट्री पर भी किया कमेंट
आर्टिकल ने ये सुझाव दिया है कि सिनर्जीज के अलावा भी भारत काफी कुछ करेगा. भारत को एनएसजी में एंट्री नहीं मिलने पर चीनी अखबार ने लिखा, ' का सदस्य नहीं बन पाने पर भारत हमें बदनाम न करे. चीन और भारत दोनों ही जिम्मेदार देश हैं और तीन दशकों से एक दूसरे के साथ समझौते के तहत कई क्षेत्रों में काम कर रहे हैं. दोनों ही देश अपने विवादों का हल निकालकर देश में शांति कायम करने की कोशिश में जुटे हैं.‘

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