फीफा वर्ल्ड कप 2018 में पाकिस्तान से आएगी गेंद, लगी होगी खास चिप

टेलस्टार-18 में एनएफसी चिप लगी है. इस चिप के जरिए गेंद को स्मार्ट फोन से कनेक्ट कर खेल से जुड़े कई अहम आंकड़े हासिल किए जा सकते हैं.

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टेलस्टार फुटबॉल (Getty Images) टेलस्टार फुटबॉल (Getty Images)

तरुण वर्मा

  • मॉस्को (रूस),
  • 04 जून 2018,
  • अपडेटेड 5:34 PM IST

फुटबॉल के महासंग्राम यानी फीफा वर्ल्ड कप में कुछ ही दिनों का समय बचा है. 14 जून से 15 जुलाई तक रूस में 32 टीमों के बीच होने वाले घमासान का इंतजार फुटबॉल प्रेमियों को है. भारत भले ही इस टूर्नामेंट में हिस्सा न हो लेकिन फिर भी यहां फुटबॉल फीवर देखने को मिलता है. यह इस फुटबॉल के महाकुंभ का 21वां संस्करण होगा.

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फीफा वर्ल्ड कप 2018 में पहली बार चिप लगी गेंद 'टेलस्टार-18' से खेला जाएगा. टेलस्टार-18 को एडिडास ने डिजाइन किया है. एडिडास ने लगातार 13वीं बार वर्ल्ड कप की गेंद को डिजाइन किया है.

दैनिक भास्कर के मुताबिक एडिडास ने इसका नाम 1970 में डिजाइन की गई गेंद टेलस्टार के नाम पर रखा गया है. एडिडास ने अपनी पहली वर्ल्ड कप गेंद के नाम पर इस बार की गेंद का नाम 'टेलस्टार-18' रखा है.

टेलस्टार-18 में एनएफसी चिप लगी है. इस चिप के जरिए गेंद को स्मार्ट फोन से कनेक्ट कर खेल से जुड़े कई अहम आंकड़े हासिल किए जा सकते हैं. यह गेंद आम लोगों और खिलाड़ियों के खरीदने के लिए उपलब्ध है.

टेलस्टार-18 गेंद  में छह पैनल वॉल होने से उसकी फ्लाइट स्टैबलिटी बढ़ जाएगी. माना ये भी जा रहा है कि 3डी सतह होने के कारण गेंद को नियंत्रित करना आसान होगा. टेलस्टर-18 किक लगने के बाद हवा में काफी देर तक लहराएगी, जिससे इसकी गति को परखना आसान नहीं होगा.

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टेलस्टार-18 का उत्पादन पाकिस्तान के सियालकोट में फॉरवर्ड स्पोर्ट्स कंपनी ने किया है. यह कंपनी हर महीने 7 लाख गेंद बनाती है. 1994 से यह एडिडास के साथ काम कर रही है. 2014 और 2018 वर्ल्ड कप के लिए भी इसी कंपनी ने गेंद बनाई थी.

टेलस्टर-18 का उपयोग रूस में वर्ल्ड कप मैचों के दौरान किया जाएगा. 1970 टेलस्टार बॉल की तरह ही इसको डिजाइन किया गया है. गेंद में केवल छह पैनल वॉल हैं जबकि पुराने टेलस्टार में 32 पैनल वॉल एक साथ थे. इस बार इसकी सतह को भी 3डी डिजाइन में बनाया गया है.

टेलस्टार-18 में एनएफसी माइक्रोचिप लगी से एडिडास कंपनी के उपभोक्ता मोबाइल को सीधे गेंद से जोड़ सकते हैं, जो कि उन्हें पैर से लगे शॉट और हेडर सहित अन्य जानाकरियां देगी. 1994 में अमेरिका हुए वर्ल्ड कप के बाद पहली बार गेंद सिर्फ काले और सफेद रंग में होगी.

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