नरेंद्र मोदी सरकार का एक साल पूरा होने पर भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से इंडिया टुडे के विशेष संवाददाता पीयूष बबेले और संतोष कुमार ने सड़क सुरक्षा कानून और अन्य मुद्दों पर बातचीत की. पेश हैं खास अंशः
आप के एक साल के कार्यकाल की सबसे बड़ी कामयाबी और चुनौती क्या है?
साल भर पहले जब मैंने इस विभाग की जिम्मेदारी संभाली तो राजमार्ग बनने की रफ्तार 2 किमी प्रति दिन थी. आज एक साल बाद 12 किमी. प्रति दिन राष्ट्रीय राजमार्ग बन रहे हैं. महीने के अंत तक यह रफ्तार 14 किलोमीटर प्रति दिन पहुंच जाएगी. मेरा लक्ष्य है कि दो साल में देश में हर दिन 30 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग बनें.
प्रस्तावित सड़क सुरक्षा कानून में लोगों को क्या सहूलियत मिलेगी?
इस विधेयक का उद्देश्य देश में परिवहन और सड़क सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचे में बदलाव करना है. दुनिया के अच्छे कानूनों का अध्ययन करके इसे भारतीय हालात को ध्यान में रख कर बनाया गया है. देश भर में हर साल 5 लाख हादसे होते हैं. हमारा लक्ष्य है कि हम सड़क हादसों की संख्या में 50 फीसदी कमी लाएं. ड्राफ्ट बिल में गोल्डन आवर यानी दुर्घटना के बाद के पहले घंटे में तुरंत इलाज की व्यवस्था की गई है. योजना में पीड़ितों को दुर्घटना स्थल से अस्पताल तक ले जाने की योजना है और पहले 48 घंटों में 30,000 रु. तक का इलाज नजदीकी सरकारी या निजी अस्पताल में बीमा से हो जाएगा.
आपने मुंडे साहब की मृत्यु के बाद एक महीने में नया कानून लाने की बात कही थी, लेकिन यह अब तक नहीं आ सका.
इस विधेयक के बारे में राज्यों से भी राय ली जा रही है. उसके बाद कैबिनेट से मंजूरी के बाद अगले सत्र में इस विधेयक को संसद में पेश किया जाएगा.
कानून के शुरुआती मसौदे सख्त थे लेकिन अब तो यह नरम हो गया है.
विधेयक में आर्थिक जुर्माना, पेनाल्टी पॉइंट्स, सामुदायिक सेवा, इम्पाउंडमेंट और कार चलाने से प्रतिबंधित करने के प्रावधान किए गए हैं. बार-बार अपराध करने वालों पर कड़े दंड के प्रावधान हैं. विधेयक से पंजीकरण और लाइसेंस प्रक्रिया पारदर्शी होगी. इसके लिए ई-टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा. इस तरह की व्यवस्था से दोहरे कराधान की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा.
दुर्घटना में मौत की सूरत में अधिकतम 15 लाख रु. मुआवजे का मसौदे में प्रावधान है, जबकि मौजूदा कानून में परिस्थितियों के हिसाब से इससे कहीं ज्यादा मुआवजा मिल सकता है?
हमारी मूल मंशा यह है कि गरीब से गरीब आदमी को भी दुर्घटना का सही मुआवजा मिले. बीमा कंपनियों ने भी कहा कि इसका कोई मानक तय किया जाए. अब गरीब आदमी को भी कम से कम 15 लाख रु. मुआवजा मिले, यही हमारी मंशा है.
लेकिन विधेयक के मसौदा-4 की धारा 227 (2) न्यूनतम नहीं अधिकतम मुआवजा 15 लाख बता रही है. यानी गरीब को कम पैसे तो मिल सकते हैं, लेकिन 15 लाख रु. से अधिक नहीं मिलेंगे?
मैं अभी नागपुर में हूं. बिल का ड्राफ्ट अभी मेरे सामने नहीं है. हमारी मूल मंशा यही है कि गरीब से गरीब आदमी को भी दुर्घटना मृत्यु पर कम से कम 15 लाख रु. का मुआवजा मिले. वैसे भी बिल का नया ड्राफ्ट तैयार हो रहा है.
पीयूष बबेले