एनवायरमेंट एसेसमेंट ड्राफ्ट 2020 को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का पालन न होने को लेकर अवमानना याचिका दायर की गई थी, जिसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार को नोटिस दिया है. कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय को 17 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
17 अगस्त को कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई में पर्यावरण मंत्रालय को साफ करना होगा कि वो दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का पालन क्यों नहीं कर पाया. दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस साल 2020 के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) की अधिसूचना के संबंध में आपत्तियां और सुझाव देने की अंतिम तिथि 11 अगस्त करने का आदेश दिया था, जिसमें परियोजनाओं के लिए वास्तविक प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी है.
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अवमानना याचिका में कहा गया है कि पर्यावरण मंत्रालय ने हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद 40 दिन बीतने के बाद भी अपनी वेबसाइट पर 22 शेड्यूल लैंग्वेज का ट्रांसलेटिड वर्जन नहीं डाला. दिल्ली हाई कोर्ट ने एनवायरमेंट एसेसमेंट ड्राफ्ट 2020 के मद्देनजर सरकार को किसी भी प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने से पहले आम लोगों की राय को शामिल करने का आदेश दिया था, साथ ही कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय को निर्देश दिया था कि वो अपनी वेबसाइट और राज्य के सभी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपनी वेबसाइट पर स्थानीय भाषाओं में एनवायरमेंट एसेसमेंट ड्राफ्ट 2020 का ट्रांसलेटेड वर्जन अपलोड करे.
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हाई कोर्ट ने इसके लिए पर्यावरण मंत्रालय को 11 अगस्त तक का वक्त दिया था, लेकिन समय पूरा होने के बाद भी न तो पर्यावरण मंत्रालय ने और न ही राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हाई कोर्ट के आदेश का पालन किया. इस साल केंद्र सरकार एनवायरमेंट एसेसमेंट ड्राफ्ट 2020 को कोरोना के कारण सरकार आम लोगों की रायशुमारी को हर साल की तरह इस साल शामिल नहीं कर पाई थी. जिसके बाद एनवायरमेंट एसेसमेंट ड्राफ्ट 2020 की खामियों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई थी.
हालांकि, 30 जून के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे चुकी है, जिस पर अगली सुनवाई 13 अगस्त को होनी है. एनवायरनमेंट एसेसमेंट ड्राफ्ट को लेकर केंद्र सरकार का तर्क है कि कोरोना के बाद हालात अब पहले जैसे नहीं रहे हैं, साथ ही कुछ प्रोजेक्ट को रोकना सरकार के लिए बेहद मुश्किल है, क्योंकि वो पहले ही बहुत लेट हो चुके हैं. पर्यावरण के लिए काम करने वाले विक्रांत तोंगड़ ने दिल्ली हाई कोर्ट में अवमानन याचिका दायर की है.
पूनम शर्मा