डीएमआरसी की कमाल की सवारी

आज दिल्ली मेट्रो का जाल 218 किमी में फैला हुआ है. इसके 164 स्टेशन हैं और 17 किमी लंबी एयरपोर्ट मेट्रो लिंक अलग है, जिसमें छह स्टेशन हैं. मेट्रो हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी पहुंच चुकी है और वाहनों की भीड़ वाले नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) में प्रदूषणमुक्त यातायात का साधन है. 

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 मेट्रो मैन ई श्रीधरन मेट्रो मैन ई श्रीधरन

संदीप उन्नीथन

  • नई दिल्ली,
  • 22 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 3:01 PM IST

डीएमआरसीः स्थापनाः 1995

ऐतिहासिक है सफर

 अपने देश का पहला भूमिगत मेट्रो स्टेशन दिल्ली मेट्रो ने नहीं बनाया था. यह गौरव 1984 में कोलकाता मेट्रो को मिल चुका है. लेकिन दिल्ली मेट्रो कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) की उपलब्धि यह रही है कि उसने एक संस्था खड़ी कर दी जिसने बड़ी गति और कुशलता से बहुत कम समय में विश्व स्तर की त्वरित यातायात परियोजनाओं को साकार किया.

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कोलकाता मेट्रो की 27 किलोमीटर लंबी लाइन तैयार करने में 12 साल लगे, पर दिल्ली मेट्रो ने 2005 में 7 साल में 65 किमी लाइन तैयार कर दी और वह भी समय सीमा से दो साल नौ महीने पहले.

आज दिल्ली मेट्रो का जाल 218 किमी में फैला हुआ है. इसके 164 स्टेशन हैं और 17 किमी लंबी एयरपोर्ट मेट्रो लिंक अलग है, जिसमें छह स्टेशन हैं. मेट्रो हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी पहुंच चुकी है और वाहनों की भीड़ वाले नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) में प्रदूषणमुक्त यातायात का साधन है. अभी देश के छह शहरों में मेट्रो सेवा है और अहमदाबाद से लेकर कानपुर तक करीब दर्जन भर दूसरे शहरों में भी इसकी परियोजनाओं पर काम चल रहा है.

डीएमआरसी के क्रियान्वयन के अनूठे मानकों ने इसके प्रबंध निदेशक 85 वर्षीय ई. श्रीधरन के लिए सुनिश्चित कर दिया है कि वे कभी भी रिटायर नहीं होंगे. उत्तर प्रदेश में मेट्रो परियोजना से इस्तीफा देने की उनकी ताजा कोशिश को भी प्रदेश के मुख्मंत्री योगी आदित्यनाथ ने निष्फल कर दिया है.

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—संदीप उन्नीथन

 

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