मुख्यमंत्री जयललिता के साथ गर्मागर्मी के दौरान एक अभूतपूर्व घटना के तहत तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता विजयकांत को दस दिन के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया. उनके खिलाफ यह कदम विशेषाधिकार हनन के लिए उठाया गया है.
स्पीकर डी जयकुमार ने अभिनेता से नेता बने विजयकांत के खिलाफ यह कदम एक दिन पहले उनके और डीएमडीके विधायकों को सामूहिक रूप से सदन से बाहर किए जाने बाद उठाया गया. उनकी मुख्यमंत्री जयललिता से गर्मागर्म बहस हो गयी थी.
सुबह सदन की बैठक शुरू होने पर जयकुमार ने विशेषाधिकार समिति की सिफारिशों के आधार पर विजयकांत के निलंबन की घोषणा की. इससे डीएमडीके सदस्य नारेबाजी करने लगे और इस विषय पर चर्चा की उनकी मांग खारिज किए जाने पर सदन से वाकआउट कर गए.
द्रमुक और वाम दलों के सदस्य भी जयललिता सरकार पर ‘तानाशाहीपूर्ण’ रवैया अपनाए जाने का आरोप लगाते हुए सदन से चले गए. वाम दल अन्नाद्रमुक के गठबंधन वाली सरकार में भागीदार हैं.
विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखे जाने के बाद सदन ने वित्त मंत्री तथा सदन के नेता ओ पनीरसेल्वम द्वारा पेश प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी.
स्पीकर ने कहा कि डीएमडीके के अन्य सदस्यों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी है लेकिन यदि उन्होंने अपना व्यवहार नहीं बदला तो उन्हें भी छोड़ा नहीं जाएगा.
डीएमडीके के संस्थापक नेता विजयकांत ने सदन के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘हमारे साथ गठबंधन के कारण वे सत्ता में आए. वे भूल गए और वे अहसानफरामोश हैं.’
राजग के 13 महीने के शासन के दौरान भाजपा के साथ अन्नाद्रमुक के अंशकालिक गठबंधन का जिक्र करते हुए विजयकांत ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंन कहा था, ‘अब मैं चैन की नींद सो पाउंगा.’
वाजपेयी ने यह बात जयललिता द्वारा उनकी केन्द्र सरकार से समर्थन वापस लेने और सरकार गिरने के बाद कही थी.
उन्होंने कहा, ‘मैंने सोचा था कि जयललिता बदल गयी हैं लेकिन नहीं.’ उनकी पार्टी ने पिछला निगम चुनाव अकेले लड़ा था और यह अन्नाद्रमुक के साथ उनके रास्ते अलग होने का स्पष्ट संकेत था.
आजतक ब्यूरो