भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में नहीं मिला मोदी के दफ्तर का साथ: संजीव चतुर्वेदी

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता संजीव चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आड़े हाथों लिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री दफ्तर (पीएमओ) पर आरोप लगाया है कि उसने हरियाणा और एम्स में उनके भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में साथ नहीं दिया.

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Sanjeev Chaturvedi Sanjeev Chaturvedi

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2015,
  • अपडेटेड 11:42 PM IST

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता संजीव चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आड़े हाथों लिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री दफ्तर (पीएमओ) पर आरोप लगाया है कि उसने हरियाणा और एम्स में उनके भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में साथ नहीं दिया.

हरियाणा के 2002 बैच के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी एम्स में कई भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने के लिए जाने जाते हैं और पिछले साल जब उन्हें एम्स के सीवीओ पद से हटाया गया तो बड़ा विवाद हुआ था. इसके लिए मोदी सरकार के स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा पर आरोप लगाए गए थे.

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'मैंने मोदी के नारे को उसी रूप में लिया'
उन्होंने कहा, 'जब मैं हरियाणा व एम्स में भ्रष्टाचार से जंग लड़ रहा था, तो मेरे खिलाफ तरह-तरह की झूठी बातें फैलाई गईं.' चतुर्वेदी ने कहा, 'मेरी गलती यह थी कि मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग के दौरान मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'न खाऊंगा, न खाने दूंगा' के नारे को उसी रूप में ले लिया, जिस रूप में यह प्रतिध्वनित होता है.'

मैग्सेसे फाउंडेशन ने बुधवार को चतुर्वेदी और सामाजिक कार्यकर्ता अंशु गुप्ता को साल 2015 का मैग्सेसे अवॉर्ड दिए जाने की घोषणा की. इसके बाद चतुर्वेदी ने एक टीवी चैनल से कहा, 'पीएमओ ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में साथ नहीं दिया.' एम्स के सतर्कता अधिकारी रह चुके चतुर्वेदी ने कहा, 'असहिष्णु रवैया भ्रष्टाचार के खिलाफ होना चाहिए, न कि ईमानदार अधिकारियों के खिलाफ.'

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