धोनी को अगले वर्ल्ड कप तक कप्तान बने रहना चाहिए: सहवाग

धाकड़ बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने आलोचकों के कोपभाजन बने महेंद्र सिंह धोनी का बचाव करते हुए कहा है कि उन्हें अगले वर्ल्ड कप तक भारत का सीमित ओवरों का कप्तान बने रहना चाहिए.

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वीरेंद्र सहवाग और महेंद्र सिंह धोनी वीरेंद्र सहवाग और महेंद्र सिंह धोनी

अभिजीत श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 30 अक्टूबर 2015,
  • अपडेटेड 11:57 AM IST

धाकड़ बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने आलोचकों के कोपभाजन बने महेंद्र सिंह धोनी का बचाव करते हुए कहा है कि उन्हें अगले वर्ल्ड कप तक भारत का सीमित ओवरों का कप्तान बने रहना चाहिए.

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने वाले ने के बारे में सवालों का जवाब देते हुए कहा, ‘उन्हें अगले तक कप्तान रहना चाहिए. यदि ऐसा होता है तो वह अच्छी वर्ल्ड कप टीम छोड़कर जाएंगे. यदि वह संन्यास लेते हैं तो आप सोच सकते हैं कि अभी उनके रहते ही लोगों को सोचना पड़ रहा है कि पांचवें, छठे और सातवें स्थान पर बल्लेबाजी कौन करेगा.’ उन्होंने कहा, ‘यदि धोनी नहीं होंगे तो पांचवां, छठा और सातवां स्थान बिल्कुल खाली हो जाएगा और कोई इतने अच्छे तरीके से मैच फिनिश करने वाला भी नहीं होगा.

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इस आक्रामक बल्लेबाज ने इन रिपोर्ट को खारिज किया कि भारतीय टीम से उन्हें बाहर करने के फैसले के पीछे थे. ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि धोनी ने ऐसा किया होगा. वह दिल से अच्छा आदमी है. सभी सीनियर खिलाड़ी उसका सम्मान करते हैं. जब वह कप्तान बना तो सभी सीनियर उसकी कप्तानी में खेले, उसे मार्गदर्शन दिया और अच्छे सुझाव दिए जिन पर उसने अमल किया और हमारी टीम ने टी20, वनडे और टेस्ट मैच जीते.’

यह पूछने पर कि क्या उनके धोनी के साथ मतभेद रहे, ‘ ने कहा, मुझे नहीं लगता कि ऐसा कुछ हुआ. यह मीडिया की अटकलें थी कि सहवाग और धोनी की ठन गई है. हम साथ में होटल में रहते थे और मैच खेलते थे. यदि ऐसा कुछ होता तो मुझे बहुत पहले बाहर कर दिया गया होता. मुझे नहीं लगता कि वह बयान (सौरव गांगुली का) सही था (कि सहवाग के टीम इंडिया से बाहर होने के पीछे धोनी का हाथ था).’

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गांगुली ने कहा था कि चयन मसलों में कप्तान की हमेशा भूमिका होती है. इस बारे में सहवाग ने कहा, ‘चार टेस्ट में खराब खेलने पर कोई भी खिलाड़ी बाहर हो सकता है, चाहे वह कप्तान हो, सीनियर या जूनियर. उन्होंने कहा, ‘चयनकर्ता तय करते हैं. कप्तान द्वारा खिलाड़ियों को चुनने या बाहर करने का चलन गांगुली के कप्तान रहते था लेकिन राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले के कप्तान बनने के बाद हालात बदल गए. उन्होंने चलन को बदला और यह तय किया गया कि अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी ही खेलेंगे.’

भारत के पूर्व कोच ग्रेग चैपल ने अपने कॉलम में लिखा था कि सहवाग और धोनी के बीच इसलिए ठन गई क्योंकि सहवाग कप्तान बनना चाहते थे, इस बारे में सहवाग ने कहा, आप इस बारे में धोनी से पूछ सकते हैं. हमने 2007 वर्ल्ड कप साथ में खेला. यह कहना कि मैं कप्तान बनना चाहता था, पूरी तरह से गलत है. धोनी जब कप्तान बने तब मैं उनकी कप्तानी में खेला और हमने टी20 वर्ल्ड कप जीता.

सहवाग ने कहा, ‘टेस्ट के लिए जब चयन हो रहे थे तब मैंने साफ तौर पर मुख्य चयनकर्ता से कहा कि मेरी कप्तान या उपकप्तान बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है. आप के. श्रीकांत से पूछा सकते हैं. मैंने उनसे कहा था कि आप किसी को भी उपकप्तान चुन सकते हैं. आप धोनी से पूछ लीजिए. मेरी कप्तान बनने में कोई रुचि नहीं थी.’

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अकेले धोनी की वजह से नहीं जीते वर्ल्ड कप
सहवाग अपने 2012 के उस बयान पर अटल रहे जिसमें उन्होंने एक क्रिकेटर को वर्ल्ड कप जीत का श्रेय दिए जाने का विरोध किया था. उन्होंने छह जुलाई 2012 को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि टीम धोनी की कप्तानी की वजह से वर्ल्ड कप नहीं जीती बल्कि इसलिए जीती क्योंकि टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया था.

सहवाग ने कहा, ‘यहां मौजूद किसी भी व्यक्ति से पूछ लीजिए कि मेरा बयान सही था या गलत. मेरा बयान गलत नहीं था लेकिन उसे गलत तरीके से पेश किया गया. उन्होंने कहा, ‘मैं धोनी की आलोचना नहीं कर रहा था. मैंने इतना ही कहा था कि पूरा श्रेय कप्तान को ही नहीं बल्कि टीम को भी दिया जाना चाहिए.’

सहवाग ने कहा, ‘यदि आप रिकॉर्ड देखें तो धोनी अब तक भारत के सर्वश्रेष्ठ कप्तान है. सौरव गांगुली को पछाड़कर उन्होंने टेस्ट, वनडे और टी20 और दो वर्ल्ड कप जीते. इससे कोई इनकार नहीं कर सकता लेकिन सिर्फ एक व्यक्ति को श्रेय देना गलत है.

उन्होंने कहा, ‘मैंने पहले मैच में 175 रन बनाए. धोनी ने आखिरी मैच में 92 रन बनाए. गौतम गंभीर ने रन बनाए और युवराज सिंह ‘मैन ऑफ द सीरिज’ था. कल कोई यह कहे कि हमने युवराज की वजह से वर्ल्ड कप जीता तो क्या कोई मानेगा.’

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