इस साल ईद के मौके पर हमने सलमान खान की कुश्ती देखी थी और अब क्रिसमस पर आमिर खान ने इस खेल के दांव दिखाए हैं. जब से 'सुल्तान' और 'दंगल' की मेकिंग की खबरें आईं, तभी से आमिर खान और सलमान खान की फिल्मों की तुलना शुरू हो गई थी.
फिर 'सुल्तान' की जबरदस्त बॉक्स ऑफिस सफलता के बाद से की सफलता के आंकड़ों पर और भी नजरें लगी थीं. अब कमाई के 'दंगल' आमिर हमारे 'सुल्तान' को पटकनी दे पाते हैं या नहीं, ये तो जल्द पता लग जाएगा. लेकिन उससे पहले जानते हैं कि फिल्म मेकिंग में 'दंगल' और 'सुल्तान' क्या अलग है और एक जैसा -
कुश्ती के दांव-पेच
आमिर और की फिल्में कुश्ती के खेल पर आधारित हैं और देश के लिए मेडल पाने का जज्बा दोनों में है. लेकिन ट्रीटमेंट बिल्कुल अलग है.
'सुल्तान' जहां एक पहलवान के खुद को पाने की कहानी है. वहीं, 'दंगल' में एक पिता अपने सपने पूरे करने के लिए बेटियों को हुनरमंद बनाता है.
अब जहां तक बात पहलवानी दिखाने की है तो इस तकनीक में सलमान पर भारी पड़ती है.
भले ही आमिर ने बस फिल्म की शुरुआत के कुछ सीन में ही कुश्ती की है लेकिन बाद में जिस तरह वह अपनी बेटियों को कुश्ती करवाते और सिखाते हैं,
उसमें तकनीक बेहतर दिखी है. यही वजह है कि 'सुल्तान' में अनुष्का शर्मा की पटकनियों से ज्यादा 'दंगल' में फातिमा सना शेख के दांव रियल और रोमांचक
दिखते हैं.
स्टार पावर
'सुल्तान' की पैकेजिंग अच्छी थी लेकिन इस पर कहीं न कहीं सलमान का स्टार स्टेटस हावी था. ये चीज में नहीं है. आमिर खान फिल्म में बस
महावीर सिंह फोगाट ही हैं... एक किरदार. यही वजह है कि जहां सलमान की 'सुल्तान' में एंट्री और हर पटकनी पर सीटी बजती है, वहीं 'दंगल' में फिल्म का
अंत पता होने के बावजूद आंखें स्क्रीन पर टिकी रहती हैं.
निर्देशक की पकड़
और 'सुल्तान', दोनों ही फिल्मों के निर्देशकों के खाते में इनसे पहले कोई बड़ी हिट नहीं है. ऐसे में दोनों ने खान स्टार्स के साथ आत्मविश्वास से काम
किया है. लेकिन 'सुल्तान' के डायरेक्टर अली अब्बास जफर ने फिल्म को ज्यादा रोमांचक और कसा हुआ बनाया है. जबकि 'दंगल' के डायरेक्टर नितेश तिवारी
ने इमोशंस और कुश्ती तो भरपूर दिखाई लेकिन फिल्म को रियल बनाने के चक्कर में रोमांच थोड़ा कम कर दिया.
अभिनय में कौन आगे
अब ये सवाल उठना नहीं चाहिए था लेकिन फिल्मों की तुलना होगी तो ये पॉइंट छूटेगा भी नहीं. सलमान तो सलमान हैं और फिल्म रिव्यूज में कहा भी गया
था कि ये उनके करियर की बेस्ट फिल्म रही है.
वहीं आमिर खान 'दंगल' में आमिर खान बस तभी लगते हैं, जब आप उनके कान देखते हैं. वरना पूरी फिल्म में उन्होंने महावीर सिंह फोगाट के किरदार को जैसे जिया है, उससे तो यही साबित होता है कि पर्दे पर भावों के 'सुल्तान' वही हैं!
दंगल दंगल या सुल्तान...
'सुल्तान' का म्यूजिक विशाल-शेखर ने दिया था. स्टोरी के हिसाब से इसमें रोमांटिक एंगल ज्यादा था. जग घूम्या, 440 वोल्ट, बेबी को बेस पसंद है... जैसे
गाने अभी भी चल रहे हैं. डांस का स्कोप होने के चलते ये गाने पार्टीज में भी खूब चले.
वहीं, 'दंगल' में हानिकारक बापू, धाकड़, थीम सॉन्ग दंगल... के लिए प्रीतम ने अच्छी कंपोजिशंस बनाई हैं. बाकी गानों को प्रमोट नहीं किया गया और इनमें उतना दम नहीं है. तो म्यूजिक के अखाड़े में 'सुल्तान' बेहतर मानी जा सकती है.
मेधा चावला