अंडमान से आंध्र की ओर बढ़ रहा 'वरदा', पाकिस्तान ने इस तूफानी चक्रवात को दिया फूल का नाम

बंगाल की खाड़ी उठे चक्रवाती तूफान वरदा के चलते अंडमान में फंसे सैलानियों को निकालने में दिक्कत आ रही है. अंडमान में खराब मौसम के चलते 1900 टूरिस्ट फंसे हैं, इसमें 320 विदेशी सैलानी हैं. वरदा तूफान के चलते पिछले 5 दिनों से बारिश हो रही है. ‘वरदा’ को आगे बढ़ने में काफी समय लगेगा और इस दौरान यह विशाल समुद्री क्षेत्र का सफर तय करेगा जिससे इसके और प्रभावी होकर भीषण चक्रवात का रूप अख्तियार करने की पूरी संभावना है.

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वरदा तूफान की सैटेलाइट से ली गई तस्वीर वरदा तूफान की सैटेलाइट से ली गई तस्वीर

बंगाल की खाड़ी उठे चक्रवाती तूफान वरदा के चलते अंडमान में फंसे सैलानियों को निकालने में दिक्कत आ रही है. अंडमान में खराब मौसम के चलते 1900 टूरिस्ट फंसे हैं, इसमें 320 विदेशी सैलानी हैं. वरदा तूफान के चलते पिछले 5 दिनों से बारिश हो रही है. ‘वरदा’ को आगे बढ़ने में काफी समय लगेगा और इस दौरान यह विशाल समुद्री क्षेत्र का सफर तय करेगा जिससे इसके और प्रभावी होकर भीषण चक्रवात का रूप अख्तियार करने की पूरी संभावना है.

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इस समय 'वरदा' उत्तरी दिशा में आगे बढ़ रहा है लेकिन आने वाले 24 से 48 घंटों के दौरान इसकी दिशा में बदलाव होगा और उत्तर-पश्चिम में आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ेगा. 12 दिसंबर को आंध्र प्रदेश के तटीय भागों में काकीनाड़ा और नेल्लोर के बीच से भारतीय भू-भाग को पार करेगा. हालांकि लैंडफॉल के दौरान यह कुछ कमजोर हो सकता है. इससे आंध्र के अलावा ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में भी बारिश होने की संभावना है.


इस वर्ष उत्तर-पूर्वी मॉनसून के दौरान ‘क्यांत’ और ‘नाडा’ के बाद बंगाल की खाड़ी में विकसित होने वाला ‘वरदा’ तीसरा चक्रवाती तूफान है. तूफानी चक्रवातों का नामकरण तमाम चेतावनी केंद्रों की ओर से किया जाता है. इससे मौसम विभाग और आम जनता को मौसम से जुड़ी भविष्यवाणी, चेतावनी आदि को लेकर कम्यूनिकेशन में आसानी होती है.

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दुनिया में तूफानी चक्रवातों का नामकरण हिंद महासागर के अलावा, ऑस्ट्रेलियाई रीजन, अटलांटिक, ईस्टर्न, सेंट्रल, वेस्टर्न और दक्षिणी प्रशांत बेसिन भी करते हैं. उत्तरी हिंद महासागर में चक्रवाती तूफानों का नामकरण भारतीय मौसम विभाग करता है. जब हवा की स्पीड कम से कम 63 किलोमीटर प्रति घंटे हो जाती है और यह कुछ देर बरकरार रहती है तो 3 मिनट के भीतर ये चक्रवाती तूफान का रूप धारण कर लेती है. इन तूफानों के नाम के लिए आठ लिस्ट हैं जिन्हें क्रम के हिसाब से इस्तेमाल किया जाता है और ये हर कुछ साल पर रोटेट नहीं होते. कुछ चक्रवाती तूफानों के नाम रिटायर भी हो गए हैं.


हिंद महासागर में पड़ने वाले भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, श्रीलंका और थाइलैंड इन तूफानों के नामकरण में योगदान करते हैं. ऐसे में तूफानी चक्रवातों के कुल 64 नामों की सूची है. इस लिस्ट के मुताबिक क्यांत के नामकरण में म्यांमार का योगदान रहा, नाडा के नामकरण में ओमान का योगदान रहा जबकि वरदा के नामकरण में पाकिस्तान का योगदान रहा है. 'वरदा' शब्द का मतलब अरबी या उर्दू में 'गुलाब' होता है. क्यांत का मतलब 'घड़ियाल' और 'नाडा' का मतलब 'कुछ नहीं' होता है. पाकिस्तान की ओर से इससे पहले समुद्री तूफानों के नाम फानूस, नरगिस, लैला और निलोफर रखे गए थे जबकि वरदा के बाद वाले तूफानों के नाम तितली और बुलबुल हैं.

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