उत्तरी 24 परगना जिले में कोलकाता के बाहरी इलाके के कदम्पुकुर गांव में 55 साल के भूपति नस्कर अपने चाय के स्टाल के बिखरे पड़े टुकड़े उठा रहे थे. बीते गुरुवार को चक्रवाती तूफान में इनकी छत की टिन उड़ गई थी. तूफान ने बांस से बने इनके घर को तहस नहस कर दिया. चाय की दुकान इनकी आजीविका की एकमात्र स्रोत थी.
भूपति नस्कर के सिर पर अब कोई छत नहीं है. उनकी तरह बहुत से ऐसे लोग हैं जो अपनी रात या तो शेल्टर होम में या फिर खुले आसमान के नीचे गुजार रहे हैं. पूर्वी मिदनापुर, उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों में हजारों लोगों के घर उजड़ चुके हैं. जबकि अब तक 86 लोगों की मौत हो चुकी है. प्रारंभिक सरकारी अनुमान के अनुसार दक्षिण बंगाल में 1 करोड़ से अधिक लोग तूफान से प्रभावित हुए और करीब 10.5 लाख घर क्षतिग्रस्त हुए हैं.
बंगाल सरकार का दावा है कि तकरीबन 5 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और उन्हें अस्थायी शिविर या चक्रवात आश्रय स्थलों में रखा गया. इनमें से कई शेल्टर होम पहले से ही संदिग्ध कोरोना मरीजों के लिए बने थे या अन्य राज्यों से बंगाल लौटने वाले प्रवासियों को अलग करने के लिए बने क्वारनटीन सेंटर थे.
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अचानक आने वाली आपदा की वजह से लोग कोरोना को लेकर बरती जाने वाली सावधानियों को भूल बैठे. पहले से ही कोरोना महामारी फैली हुई थी, और अचानक आए चक्रवाती तूफान की वजह से राज्य प्रशासन के पास उन शेल्टर होम्स में ज्यादातर लोगों को रहने का इंतजाम करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. बंगाल में स्कूलों को रातोंरात शेल्टर होम में तब्दील कर दिया गया था.
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विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सामुदायिक संक्रमण का खतरा बढ़ गया है क्योंकि साइक्लोन शेल्टर होम में सोशल डिस्टेंसिंग और स्वच्छता का पालन मुमकिन नहीं हो पाएगा.
पश्चिम बंगाल में 2009 में विनाशकारी 'आइला' के बाद इन शेल्टर होम्स का मूल रूप से मवेशियों को रखने के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा था. सबसे बुरी तरह प्रभावित जिला दक्षिण 24 परगना जिले में अकेले में 625 राहत शिविर हैं. इनमें 1.97 लाख लोगों को रखा गया है यानी प्रत्येक शिविर में लगभग 300 से अधिक लोग रह रहे हैं.
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राज्य में कोरोना से निपटने की चुनौतियों पर चिंता जाहिर करते हुए बंगाल के स्वास्थ्य सचिव एनएस निगम ने कहा, “हम निश्चित रूप से इसके बारे में चिंतित हैं. इसीलिए सबको कहा गया है कि सोशल डिस्टेंसिंग के मानदंडों का पालन करें. हमने प्रत्येक जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी-स्वास्थ्य (CMOH) को बताया है और यदि बीमारी के बारे में जानकारी मिलती है तो वहां चेक करने के लिए डॉक्टर जाएंगे. उस स्थिति में मरीज को अलग रखने को कहा गया है.”
इंद्रजीत कुंडू