नागरिकता बिल पर JDU में दरार? PK के बाद अब पवन वर्मा नीतीश के विरोध में उतरे

पार्टी के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर के बाद अब पवन वर्मा ने भी इस बिल का विरोध किया है और नीतीश कुमार से फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है.

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फोटो: PTI) बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फोटो: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 1:32 PM IST

  • लोकसभा में पास हुआ नागरिकता संशोधन बिल
  • जदयू में बिल के समर्थन पर अलग-अलग राय
  • प्रशांत किशोर के बाद अब पवन वर्मा ने किया विरोध

लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास हो गया है और बिहार में एनडीए में साथी जनता दल (यू) ने इस बिल का समर्थन किया है. लेकिन इसी फैसले पर जदयू दो फाड़ होती नजर आ रही है. पार्टी के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर के बाद अब पवन वर्मा ने भी इस बिल का विरोध किया है और नीतीश कुमार से फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है.

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जदयू प्रवक्ता पवन कुमार वर्मा ने मंगलवार इस बारे में ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, ‘मैं नीतीश कुमार से अपील करता हूं कि राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल (CAB) पर समर्थन पर दोबारा विचार करें. ये बिल पूरी तरह से असंवैधानिक है और देश की एकता के खिलाफ है. ये बिल जदयू के मूल विचारों के भी खिलाफ हैं, गांधी जी इसका पूरी तरह से विरोध करते’.

गौरतलब है कि लोकसभा में जदयू ने नागरिकता संशोधन बिल का समर्थन किया था. लोकसभा में जदयू के कुल 16 सांसद हैं. जबकि राज्यसभा में जदयू के कुल 6 सांसद हैं.

प्रशांत किशोर ने भी किया था विरोध

पवन वर्मा से पहले जदयू के उपाध्यक्ष और राजनीति रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर इस बिल का विरोध किया था. प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर लिखा था कि ‘जदयू के द्वारा नागरिकता संशोधन बिल का समर्थन करना काफी निराशाजनक है. जदयू का इस मामले में समर्थन करना पार्टी के संविधान का भी उल्लंघन करता है और ये गांधी के विचारों के खिलाफ है.’

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आपको बता दें कि लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल बड़े बहुमत से पास हो गया है, लेकिन अभी राज्यसभा में बिल पास होना बाकी है. राज्यसभा में ये बिल बुधवार को पेश होगा, इसपर बहस के लिए 6 घंटे का समय अलॉट किया गया है.

इस बिल के अनुसार, पाकिस्तान-अफगानिस्तान-बांग्लादेश से आने वाले हिंदू, जैन, बौद्ध, ईसाई, सिख और पारसी नागरिकों को भारत में नागरिकता मिलने में आसानी होगी. विपक्ष इस बिल का विरोध कर रहा है और इसे भारत के संविधान के खिलाफ बता रहा है. लोकसभा में ये बिल 311-80 के अनुपात से पास हुआ.

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