विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से प्रोटोकॉल तोड़कर मिलेंगे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग

भारत के साथ द्विपक्षीय रिश्ते को अहमियत देते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चौंकाते हुए भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से सोमवार को मुलाकात करने पर राजी हो गए हैं. चीनी राष्ट्रपति अपने देश में आए किसी विदेश मंत्री से शायद ही मिलते हैं. कभी-कभी वह स्वेच्छा से मिलने को हामी भर देते हैं.

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Sushma Swaraj Sushma Swaraj

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 फरवरी 2015,
  • अपडेटेड 2:26 PM IST

भारत के साथ द्विपक्षीय रिश्ते को अहमियत देते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चौंकाते हुए भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से सोमवार को मुलाकात करने पर राजी हो गए हैं. चीनी राष्ट्रपति अपने देश में आए किसी विदेश मंत्री से शायद ही मिलते हैं. कभी-कभी वह स्वेच्छा से मिलने को हामी भर देते हैं.

शी जिनपिंग का भारतीय विदेश मंत्री से सीधे मिलना कई मामलों में अहम है. चीनी राष्ट्रपति के इस कदम को राष्ट्रपति बराक ओबामा की दिल्ली यात्रा से भी जोड़कर देखा जा रहा है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दिल्ली दौरे को एशिया-प्रशांत और हिंद महासागर पर भारत-अमेरिका के संयुक्त रणनीतिक दृष्टिकोण के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. जाहिर है भारत-अमेरिका के गर्मजोशी भरे रिश्ते से चीन खुद को असहज स्थिति में पा रहा है. इसके अलावा नए शासन में चीन के कट्टर प्रतिद्वंदी जापान के साथ भारत की बढ़ती निकटता से भी चीन परेशान हैं.

गौरतलब है कि चार दिवसीय दौरे पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बीती शाम चीन पहुंची. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को प्रोटोकॉल तोड़कर सुषमा स्वराज से मिलेंगे.

दूसरी ओर, रविवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भारतीय और चीनी पत्रकारों से बात करेंगी. इसके साथ ही सुषमा चीनी विदेशमंत्री वांग यी से भी मिलेंगी और दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर द्विपक्षीय वार्ता होगी.

वहीं, सोमवार को विदेशमंत्री सुषमा स्वराज भारत, रूस और चीन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता में भी हिस्सा लेंगी. सुषमा स्वराज के सामने चीन और रूस को भरोसे में लेने की चुनौती है. उन्हें अपने सबसे ताकतवर पड़ोसी को यह भरोसा दिलाना है कि अमेरिका से मजबूत रिश्ते के बावजूद भारत अपने पड़ोसी देश के साथ संबंधों को उतना ही अहमियत देता है.

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इस साल के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चीन जाएंगे. पीएम दौरे के दौरान उठने वाले मुद्दों और कार्यक्रम का खाका भी तैयार किया जाएगा. गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत दौरे पर बराक ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गर्मजोशी भरे रिश्ते को चीन ने सतही बताया था.

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