सैटेलाइट तस्वीरों से अमेरिका में चीनी कॉन्सुलेट की संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा

अमेरिकी सरकार के सूत्रों का यह भी मानना है कि चीनी कॉन्सुलेट कुछ फालुन गोंग प्रैकेटीशनर्स और तिब्बत, पूर्वी तुर्कस्तान (​​शिनजियांग) से निर्वासित कुछ लोगों का अपहरण करने में भी शामिल था. इन अपहृत व्यक्तियों को बाद में अभियोग चलाने के लिए वाया इटली चीन ले जाया जाता है.

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ह्यूस्टन में चीनी दूतावास (Photo: AFP) ह्यूस्टन में चीनी दूतावास (Photo: AFP)

aajtak.in

  • ह्यूस्टन,
  • 23 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 6:18 PM IST

चीन को भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से न सिर्फ पीछे हटने के लिए बल्कि अमेरिका के ह्यूस्टन में अपने वाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट) को खाली करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. इंडिया टुडे ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए इस कॉन्सुलेट की गतिविधियों की जांच की है.

अमेरिका ने चीन को जासूसी के आरोपों के बीच ह्यूस्टन में अपना कॉन्सुलेट बंद करने के लिए बुधवार को 72 घंटे का वक्त दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने देश में चीन के अन्य मिशनों को बंद करने के भी संकेत दिए हैं.

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ह्यूस्टन स्थित कॉन्सुलेट अमेरिका के आठ दक्षिण राज्यों के लिए कॉन्सुलर सर्विस मुहैया कराता है. ये राज्य हैं- टेक्सास, ओक्लाहोमा, लुइसियाना, अरकांसस, मिसिसिपी, अलबामा, जॉर्जिया और फ्लोरिडा. इसके अलावा स्वशासित कॉमनवेल्थ ऑफ प्यूर्टो रिको भी इसी कॉन्सुलेट के कार्यक्षेत्र में आता है.

चीनी विदेश मामलों के प्रवक्ताओं- वांग वेनबिन और झाओ लिजियन ने ओवरस्टाफिंग मुद्दे का संकेत देते हुए कॉन्सुलेट को खाली करने का नोटिस मिलने की पुष्टि की है. बता दें कि झाओ लिजियन वही शख्स हैं, जिन्होंने हाल के वर्षों में इस्लामाबाद में अपनी राजनयिक पोस्टिंग के दौरान अपने नाम से पहले मोहम्मद शब्द का इस्तेमाल किया था.

इंडिया टुडे OSINT टीम ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए ह्यूस्टन स्थित चीनी कॉन्सुलेट की गतिविधियों के बारे में क्या पाया, आइए अब उस पर नजर डालते है.

लोकेशन

ह्यूस्टन अमेरिकी राज्य टेक्सास का एक महानगर है. यह स्पेस सेंटर और NASA (नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) के अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग और फ्लाइट कंट्रोल कॉम्पलेक्स के लिए दुनिया भर में अच्छी तरह जाना जाता है.

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चीनी कॉन्सुलेट यहां 3417, हैरॉल्ड स्ट्रीट के क्रासिंग पर मॉन्ट्रोस बुलेवार्ड में स्थित है. इमारत को संभवतः चीन की ओर से इसलिए चुना गया क्योंकि यह दो तरफ से खुली है. बाकी दो तरफ टेक्सडेल्फिया, स्टारबक्स और ग्रिफ्स बार (तस्वीरों में देखें) जैसे रेस्तरां हैं.

सैटेलाइट तस्वीरें

पिछले एक दशक की सैटेलाइट तस्वीरें कॉन्सुलेट की स्थिति को दिखाती हैं. यह खुले सेंट्रल एरिया के साथ एक कॉम्पेक्ट इमारत है.

मेन एंट्री मॉन्ट्रोस बुलेवार्ड पर है और हैरोल्ड स्ट्रीट पर एक साइड एंट्री गेट है. एक पिछले हिस्से में भी एग्जिट है जो ग्रिफ़्स बार की ओर खुलता है.

बाकी पूरी इमारत बिना किसी अन्य पहुंच के बंद है. इमारत की खिड़कियां, बॉलकनी और खुले कॉरिडोर कांच से ढके हैं.

संदिग्ध घटनाक्रम

चीन के ग्लोबल टाइम्स के चीनी और अंग्रेजी संस्करणों के चीफ एडिटर और हालिया ट्विटर सनसनी @HuXijin_GT ने दावा किया कि “चीन पर कॉन्सुलेट का इस्तेमाल जासूसी के लिए इस्तेमाल करने जैसे आरोप बहुत छिछोरे हैं.

हालांकि, ऐतिहासिक तस्वीरों से पता चलता है कि चीनी कॉन्सुलेट का स्टाफ वास्तव में एक समय अवधि के लिए संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था. सैटेलाइट तस्वीरों में से एक में दिखता है कि कॉन्सुलेट की इमारत की पिछली दिशा वाली एंट्री पर एक पिक-अप ट्रक खुली कॉर्गो वाली जगह के साथ खड़ा है. कॉन्सुलेट और ग्रिफ्स बार के बीच की छोटी सड़क को पिक-अप ट्रक के सामने बेतरतीब खड़ी दो कारों से उत्तर की तरफ से एंट्री के लिए ब्लॉक किया गया है. एक और बड़ी एसयूवी हेरोल्ड स्ट्रीट पर प्रभावी ढंग से सड़क को ब्लॉक कर रही है.

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ये पता लगाना मुश्किल है कि असल में क्या कॉर्गो (सामान) था, लेकिन पूरी तस्वीर ये संकेत देती है कि उस वक्त कुछ संदिग्ध गतिविधि को निश्चित तौर पर अंजाम दिया जा रहा था.

तस्वीरों में कॉन्सुलेट की इमारत के ऊपर कई संदिग्ध एंटीना देखे जा सकते हैं.

फालुन दाफा प्रदर्शन

अमेरिकी सरकार ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) से ये भी कहा है कि वह फालुन गोंग धार्मिक आंदोलन और इसके सदस्यों के साथ अपमानजनक दुर्व्यवहार को तुरंत बंद करे. फालुन गोंग को फालुन दाफा के नाम से भी जाना जाता है.

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेओ ने एक दुर्लभ संबोधन में कहा था, "फालुन गोंग प्रैक्टीशनर्स का इक्कीस वर्षों का उत्पीड़न बहुत लंबा है, और इसे समाप्त होना चाहिए." फालुन गोंग आंदोलन को चीन ने 1999 में एक 'असंतुष्ट संगठन' घोषित करने के बाद इस पर क्रैकडाउन शुरू किया, जो आज तक जारी है.

अमेरिकी सरकार के सूत्रों का यह भी मानना है कि यह कॉन्सुलेट कुछ फालुन गोंग प्रैकेटीशनर्स और तिब्बत, पूर्वी तुर्कस्तान (​​शिनजियांग) से निर्वासित कुछ लोगों का अपहरण करने में भी शामिल था. इन अपहृत व्यक्तियों को बाद में अभियोग चलाने के लिए वाया इटली चीन ले जाया जाता है.

गिरफ्तार किए गए फालुन दाफा सदस्यों के समर्थन में और CCP के पूर्व अध्यक्ष जियांग जेमिन को न्याय दिलाने के समर्थन में इस कॉन्सुलेट के सामने कई विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं.

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जवाबी कार्रवाई संभव

चीनी विदेश मामलों के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, “चीन सरकार इस तरह के अपमानजनक और अनुचित कदम की कड़ी निंदा करती है, जो चीन-अमेरिका संबंधों को नुकसान पहुंचाएगा.”

वेनबिन ने आगे कहा, "हम अमेरिका से अपने गलत फैसले को तुरंत वापस लेने का अनुरोध करते हैं, अन्यथा चीन वैध और जरूरी प्रतिक्रिया देगा."

चीन के आधिकारिक मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के एडीटर ने दावा किया है कि अमेरिका ने पहले ही चीन के वुहान में स्थित अपने कॉन्सुलेट की पैकिंग शुरू कर दी है, इस संभावना के साथ की चीन प्रतिक्रियात्मक कदम उठाएगा.

चीन की ओर से खाली किए जाने के लिए अमेरिका के जिस कॉन्सुलेट को नोटिस दिए जाने की संभावना है, वो हांगकांग स्थित कॉन्सुलेट हो सकता है. वो लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों के की वजह से चीन सरकार के लिए आंख की किरकिरी बन गया है. इस तरह के कदम से अमेरिका आहत होगा और इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं.

सैन फ्रांसिस्को नाकामी

संबंधित घटनाक्रम में सैन फ्रांसिस्को स्थित चीनी कॉन्सुलेट भी अमेरिका में विभिन्न अवैध गतिविधियों में शामिल प्रतीत होता है. फेडरल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन (FBI) के मुताबिक, जिसने अदालत में साक्ष्य पेश किए हैं, तांग जुआन नाम का शख्स गिरफ्तारी से बचने के लिए कॉन्सुलेट में छिपा हुआ है. PLA बैकग्राउंड वाला तांग जुआन सुझोऊ यूनिवर्सिटी का फार्मासिस्ट है.

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सैटेलाइट तस्वीरों में कॉन्सुलेट के ऊपर कई संदिग्ध एंटीना और अन्य निगरानी उपकरण देखे जा सकते हैं. एंड्रयू सिए की ओर से पोस्ट की गई एक जमीनी तस्वीर से भी इसकी पुष्टि होती है. फोटो में स्पष्ट रूप से यागी एरियल, डिश एंटीना ( उनमें से कुछ संभवतः सैटकॉम के लिए), कुछ अन्य ऐन्टीना भी देखे जा सकते है, जिन्हें निकासी पाइप के आवरण में छुपाया गया है.

(कर्नल विनायक भट (रिटायर्ड) इंडिया टुडे के लिए एक सलाहकार हैं. वे सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषक हैं. उन्होंने 33 वर्ष तक भारतीय सेना में सेवा की)

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