सैटेलाइट तस्वीरों में दिखीं लद्दाख बॉर्डर पर चीन की एरियल तैयारियां

2017 से इस लोकेशन पर J-8II और J-11B लड़ाकू विमानों को भी देखा गया लेकिन कम संख्या में. ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से इन दोनों लड़ाकू विमानों की एक-एक रेजिमेंट की इस लोकेशन पर उपस्थिति का संकेत मिलता है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर (Getty Images) प्रतीकात्मक तस्वीर (Getty Images)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 1:18 AM IST

  • फाइटर जेट्स, ड्रोन्स, मिसाइल सिस्टम्स की तैनाती के संकेत
  • ताजा तस्वीरों में एक एप्रन पर खड़े दिखाई दे रहे चार विमान

ऐसा लगता है कि चीन ने पूर्वी लद्दाख के निकटतम होतान एयरबेस को हाई अलर्ट पर एक्टिव कर दिया है. ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से फाइटर जेट, ड्रोन्स, बमवर्षक और मिसाइल सिस्टम्स की तैनाती के संकेत मिलते हैं.

एयरबेस होतान शहर के पास स्थित है, जो यारकंद (चीन की यरकांत काउंटी) को जाने वाले इंडियन सिल्क रोड पर अहम ट्रांजिट प्वाइंट है. होतान अब वेस्टर्न थिएटर कमांड में चीनी वायु सेना (PLAAF) के सबसे बड़े बेस में से एक है.

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22 जून तक की ताजा सैटेलाइट तस्वीरों की जांच से इस फैसिलिटी पर चीनी वायु सेना की गतिविधियों का पता चलता है.

लोकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर

काराकोरम दर्रा के उत्तर-पूर्व में लगभग 200 किलोमीटर और पैंगोंग त्सो के फिंगर 4 एरिया से 400 किमी से कम दूरी पर स्थित होतान एयरबेस में 60 मीटर की चौड़ाई वाला 3,330 मीटर लंबा रनवे है.

यह नागरिक और सैन्य उद्देश्यों के लिए दोहरे उपयोग वाला एयरपोर्ट है. इसके तीन एप्रन PLAAF के लिए और एक सिविल टर्मिनल के लिए निर्धारित हैं.

यहां कोई समर्पित एयरक्राफ्ट शेल्टर्स नहीं हैं. शायद मामूली रिपेयर वर्क के लिए यहां एक रिपेयर हैंगर मौजूद है.

फाइटर एयरक्राफ्ट तैनाती

होतान एयरबेस पर 2014 में जे-10 फाइटर एयरक्राफ्ट्स रखने का इरादा बनाया गया था. ये संभावना ऑपरेशनल जिम्मेदारियों के साथ अच्छी तरह मेल नहीं बिठा सकी. इसकी जगह मिग 21 के चीनी संस्करण J-7 को लाया गया. ऐसा उनकी प्रतिकूल मौसम में भी ऑपरेशनल क्षमताओं की वजह से किया गया.

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2017 से इस लोकेशन पर J-8II और J-11B लड़ाकू विमानों को भी देखा गया लेकिन कम संख्या में. ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से इन दोनों लड़ाकू विमानों की एक-एक रेजिमेंट की इस लोकेशन पर उपस्थिति का संकेत मिलता है.

AEW तैनाती

ताजा सैटेलाइट तस्वीरों में एक एप्रन पर चार विशेष विमान खड़े दिखाई देते हैं. इनमें से दो Y-8G या Y-8 GX4 ELINT विमान हैं और दो KJ-500 या Y-9 GX10 अर्ली वार्निंग.

Y-8 GX4 इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस-गैदरिंग (ELINT) विमान हैं जिनमें काउंटर-मीजर्स एंटीना के लिए दो विशेष जगह होती है. इन एंटीना का उद्देश्य लंबी दूरी की स्टैंडऑफ जैमिंग होता है.

विमान की टेल के ऊपर और अगले धड़ (फ्यूसलाज) के नीचे बड़े सिलेंडर आकार (बेलनाकार) के एंटीना होते हैं. इन एंटीना को ELINT - इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस- एंटीना कहा जाता है.

Y-9 GX10 या KJ-500 विमान एयरबोर्न अर्ली वार्निंग संस्करण है जो सर्कुलर रोटोडोम के साथ फ्यूसलाज के ऊपर होता है और इससे 360 डिग्री दृश्यता मिलती है.

विमान के पीछे के धड़ (फ्यूसलाज) पर बार-टाइप साइड जगहों पर इंटरफेरोमीटर मौजूद रहते हैं जो इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट और खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के उद्देश्य से है. लद्दाख क्षेत्र में भारत के साथ मौजूदा गतिरोध के बाद चीन की ओर से ये तैनाती स्थायी हो गई लगती है.

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पुराने J-7 फाइटर्स

होतान एयरबेस में J-11B के आगमन के बाद से J-7 बैकसीट पर हो गए हैं. उन्हें शायद सक्रिय सेवा से हटा दिया गया है.

ताजा सैटेलाइट तस्वीरों में, J-7 विमान UAV (ड्रोन) हैंगर के पास एक अस्थायी एप्रन में पार्क किए गए दिखते हैं.

UAV हैंगर्स से उनकी लोकेशन की निकटता संकेत देती है कि J-7 लड़ाकू विमानों को रिमोट-कंट्रोल मॉड्यूल से लैस करने के बाद UCAV (मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहनों) के तौर पर दोबारा इस्तेमाल करने के उद्देश्य को पूरा किया जा सकता है.

UAV हैंगर्स

होतान एयरबेस पर 2015 में रनवे के दक्षिण-पूर्वी कोने पर दो नए 40mx35m हैंगर्स का निर्माण देखा गया. एक साल के भीतर ही 60mx45m के तीन नए हैंगर्स के साथ यहां पांच हैंगर्स हो गए.

इस स्थान पर ओपन-सोर्स तस्वीरों में कोई UAV नहीं देखा गया है. हालांकि, कॉमर्शियल तस्वीरों में 2018 में इन हैंगर्स के पास PLAAF के नवीनतम CH-5 UCAV को देखा गया.

SAM कवरेज

इस एयरबेस पर 2011 से एयर डिफेंस की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (SAMs) को देखा गया है. रनवे के पूर्व में 5 किलोमीटर दूरी पर एक स्थायी लोकेशन पर रिलोकेट होने से पहले इन्हें एप्रैन में ही बने रहते देखा गया.

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आज, चीन का हेडक्वार्टर-9 SAM कम से कम सात रडार के साथ इस लोकेशन पर इरेक्ट पोजीशन में दिखता है.

इस SAM बैटरी को विशेष-बल यूनिट और छोटे हेलीपोर्ट के साथ लोकेट किया गया है. इस परिसर में एक प्रशासनिक भवन भी है जिसे नेट (जाल) के साथ छुपाया गया है.

छुपे हुए रडार

रडार की स्थिति, जो कम और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों की त्रिआयामी (3 D) कवरेज प्रदान करती है. इस रडार को छुपाने के लिए हाल में आवरण से ढका गया. प्लेटफार्म्स को बड़े पैमाने पर नेटिंग से कवर किया गया है.

गोला बारूद की जगह का विस्तार

PLAAF ने तीन अतिरिक्त बड़ी इमारतों के साथ गोला-बारूद पाइंट का विस्तार किया है. इन इमारतों में से दो में सुरक्षा के लिए चारों ओर मजबूत बाड़ बनाई गई है. तीसरी इमारत संभवतः एक चेक-आउट बैरक है, जिसमें वाहन आ-जा सकते हैं.

प्रशासनिक आवास

बड़ी संख्या में प्रशासनिक भवन और अतिरिक्त सैनिकों के रहने के लिए यहां जगह बनाई गई है. निर्माण मॉड्यूलर है, जो यह बताता है कि PLAAF को निर्माण पूरा करने के लिए कितनी जल्दी थी.

PLAAF , जिसने अपनी स्थापना के बाद से कभी युद्ध जैसी नौबत नहीं देखी है, वो अब विभिन्न स्तरों पर ट्रेनिंग सेशंस के जरिए अब तक खुद को तैयार कर रही है.

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हालांकि, तत्कालीन USSR के साथ चीन के मुद्दों ने उसे PLAAF के स्वदेशीकरण पर विवश किया. चीनी सैन्य विमानों की उत्पादन दर का ऊंचा होना हैरान करने वाला है.

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