मुख्यमंत्री ने तोड़ी सैकड़ों साल पुरानी परंपरा, ओरछावासी नाराज

ओरछा में रामराजा सरकार की सैकड़ों साल पुरानी परंपरा को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने तोड़ा, कांग्रेस ने लिया आड़े हाथों, लोगों ने भी जताई नाराजगी. 

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ओरछा में रामराजा सरकार की सैकड़ों साल पुरानी परंपरा को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने तोड़ा, कांग ओरछा में रामराजा सरकार की सैकड़ों साल पुरानी परंपरा को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने तोड़ा, कांग

संध्या द्विवेदी / मंजीत ठाकुर

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  • 11 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 7:56 PM IST

बीते सप्ताह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुन्देलखंड के टीकमगढ़ जिले में स्थित ओरछा पहुंचे तो वे सीधे विपक्ष के साथ लोगों के निशाने पर आ गए। बुन्देलखंड की अयोध्या माने जाने वाली ओरछा में राम राजा सरकार का प्राचीन मंदिर है। यहां भगवान राम की मूर्ति को 16वीं शताब्दी में ओरछा की रानी अयोध्या से लेकर आईं थीं। तब से यहां राम को ही राजा मान लिया गया। मंदिर में पुलिस चौकी स्थापित कर चार बार सलामी देने की परंपरा शुरू हो गई। साथ ही ओरछा में प्रवेश के साथ ही सभी वीआईपी प्रोटोकॉल को शून्य कर दिया गया। लेकिन पांच सौ सालों से जारी इस परंपरा को इस बार बदल दिया गया। मुख्यमंत्री के पहुंचने पर भक्तों को एक घंटे तक मंदिर में प्रवेश नहीं करने देने के बाद वीवीआईपी कल्चर पर घिरी सरकार ने विवादों में आने के बाद यहां वीआईपी दर्शन के लिए 151 रुपए लेकर विशेष पास जारी करने की प्रथा की शुरूआत कर दी। अब लोग इसे राम राजा मंदिर में अमीर-गरीब के बीच भेदभाव करने की विकृत व्यवस्था बताकर गलत मान रहे हैं। 

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मुख्यमंत्री के लिए तोड़ी गई सालों पुरानी परंपरा

लेकिन बीती 28 जनवरी को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पहुंचने पर एक घंटे तक भक्तों को मंदिर के पट बंद करवाकर प्रवेश नहीं करने दिया गया। इसी को लेकर विपक्ष से लेकर आम लोगों ने शिवराज की राजसी कार्यशैली पर सवाल उठाना शुरू किए तो एक कदम आगे जाकर सरकार ने मंदिर में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था को अधिकृत रूप से लागू कर दिया। 

कांग्रेस ने लिया आड़े हाथों

बुन्देलखण्ड में कांग्रेस के बड़े नेता एवं पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री प्रदीप जैन आदित्य कहते हैं, ओरछा के रामराजा सरकार मंदिर में सभी धर्मों के लोगों की आस्था है। यहां प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी आम आदमी की तरह कतार में लगकर दर्शन किए थे। हमेशा नेता यहां जनता बनकर ही पहुंचते रहे हैं, लेकिन शिवराज सिंह चौहान राजसी वैभव के आदी हो चुके हैं। प्रदेश के राजा होने के अभिमान में उन्होंने सैकड़ों साल पुरानी आस्था और परंपरा को तोड़ दिया है। यह शर्मनाक है। शिवराज को माफी मांगनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने माफी मांगने के बजाय मंदिर में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था अधिकृत रूप से लागू कर दी। इनके मुंह में राम बगल में छुरी है, जिसके चलते बुन्देलखंड की आत्मा का गला घोंटने का काम किया गया। 

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कलेक्टर ने जारी किया वीआईपी दर्शन का आदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ओरछा दौरे के फौरन बाद टीकमगढ़ के कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने ओरछा राम राजा मंदिर में 151 रुपए में एक पास जारी कर अलग से दर्शन कराने की व्यवस्था करा दी है। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के तौर पर जारी किए गए निर्देश पर अब राम राजा सरकार मंदिर में मंदिर के भीतर मूर्ति के निकट सबसे आगे की दालान में 151 रुपए देने वाले श्रद्धालुओं को विशेष दर्शन की व्यवस्था होगी। इससे अब बिना पास वाले श्रद्धालुओं को बाहर से ही दर्शन करने होंगे। 

जब इंदिरागांधी को भी लगना पड़ा था कतार में

ओरछा पहुंचने पर प्रधानमंत्री तक को सलामी नहीं दी गई। ओरछा के लोग बताते हैं कि 1984 में जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ओरछा पहुंची थीं तो उनको राम राजा सरकार के मंदिर में प्रवेश के लिए कतार में लगना पड़ा था। वहां उनके लिए कोई प्रोटोकॉल नहीं था.

आम जनता में गुस्सा 

राम राजा के दर्शन करने पहुंचने वाले लोगों का कहना है कि आगे वीआईपी लाइन बनाने से लोगों को मूर्ति के दर्शन करने में परेशानी होने लगी है। इस व्यवस्था को बदला जाना चाहिए, लेकिन कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल कहते हैं, वीआईपी दर्शन के नाम पर गलत प्रचार हो रहा है। ओरछा में भगवान राम स्वयंभू राजा हैं उनके सामने कैसे कोई वीआईपी हो सकता है। प्रशासन पुरानी परंपरा को पूरी तरह निभा रहा है। सुविधा के नाम पर हो 151 रुपए लिए जा रहे हैं वह ट्रस्ट में जमा कर आम श्रद्धालुओं की ही सुविधा पर खर्च किए जाएंगे। कलेक्टर कहते हैं, 151 में सुविधा रसीद लेने वाले व्यक्ति को दालान से अंदर भेजकर दर्शन कराने की पात्रता दी गई है। उनको मूर्ति के सामने खड़े होने का मौका नहीं दिया जाएगा। लाइन चलती रहेगी, जिससे किसी को भी परेशानी नहीं होगी। मंदिर ट्रस्ट के लोग कहते हैं कि यह कोई वीआईपी पास नहीं है, बल्कि इसके जरिए श्रद्धालु बिना लाइन में लगे सिर्फ दर्शन ही कर सकता है। जबकि ओरछा निवासी इसे गलत ही मानते हैं। पत्रकार अजय झा कहते हैं, यह व्यवस्था मुख्यमंत्री के ओरछा आने के फौरन बाद क्यों शुरू कर दी गई। इससे रामराजा सरकार के दरबार में लोगों के बीच आम और खास होने का भेद बढ़ेगा। यह राम राजा की परिकल्पना के भी खिलाफ है, जिसमें सभी को बराबर होने का दर्जा दिए जाने की बात कही गई। यह व्यवस्था कहीं न कहीं श्रद्धा में भेदभाव को जन्म देगी। 

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ऐसे तोड़ी थी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने परंपरा 

बीते 28 दिसंबर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ओरछा पहुंचे थे। उन्होंने ओरछा में मोरारी बापू के सत्संग को सुना। मुख्यमंत्री के ओरछा मंदिर में पहुंचने को लेकर यहां राम राजा सरकार के मंदिर के पट निर्धारित समय के बाद भी आम श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोले गए। वहां देश और विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं इसिलिए वहां भारी भीड़ इकठ्ठा हो गई। करीब एक घंटे बाद वहां शिवराज सिंह पहुंचे तो लोगों ने इस पर एतराज किया। इसके बाद लोगों को दर्शन करने के लिए मंदिर में प्रवेश दिया गया। 

सीएम को ट्विटर से हटानी पड़ीं फोटो 

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपने ट्विटर अकाउंट पर रामराजा सरकार के मंदिर के भीतर दर्शन करते हुए फोटो पोस्ट की थी। जबकि यहां फोटो खींचने पर पाबंदी लगी है। इस पर विवाद शुरू हो गया। विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री के ट्विटर अकाउंट से तस्वीरों को हटा दिया गया। मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग के आयुक्त पी. नरहरि इसे सोशल मीडिया टीम की गलती मानते हैं। वह कहते हैं, जैसे ही इसकी जानकारी हुई तो ट्विटर अकाउंट से तस्वीरों को हटा लिया गया।

ओरछा की रामराजा सरकार के पीछे क्या है, कहानी

ओरछा में मधुकर शाह के राज्यकाल 1554-92 के दौरान उनकी रानी गनेश कुअंर भगवान राम की भक्त थीं। उन्होंने भगवान राम की मूर्ति स्थापना के लिए यहां पर एक विशाल चतुर्भुज मंदिर का निर्माण कराया था। कहा जाता है कि जब गनेश कुंवर अयोध्या से भगवान राम की मूर्ति लेकर लौटीं तो मंदिर में निर्माण कार्य चल रहा था, इसलिए उन्होंने राम की मूर्ति को महल में ही रख लिया। इसके बाद जब मंदिर बनकर तैयार हो गया तो मूर्ति को वहां स्थापित करने की कोशिश की गई, लेकिन मूर्ति वहां से उठी ही नहीं. इसे चमत्कार मान लिया गया और महल को ही मंदिर बना दिया गया। तब से यहां राम को ही राजा मानते हुए मंदिर को राम राजा सरकार के नाम से जाना जाने लगा. ओरछा राज के लोग तभी से भगवान राम को ही राजा मानने लगे. इसके बाद यहां किसी राजा, मंत्री-संत्री को राजसी प्रोटोकॉल और सलामी देना बंद कर दिया गया. यह परंपरा आजाद भारत में भी कायम रही। ओरछा मंदिर में पुलिस चौकी बनाकर मंदिर की मूर्ति को ही चार बार सलामी देने की परंपरा है। 

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