सिंध में बढ़ी पाक की गतिविधि‍यां, BSF ने बढ़ाई बॉर्डर पर चौकरी, सैंड स्कूटर से पहरेदारी कर रहे हैं जव

पाकिस्तान के सिंध में आतंकी संगठन जमात-उद-दावा के चीफ हाफिज सईद के लगातार दौरों और कश्मीर में पहली बार सिंध के आतंकी के पकड़े जाने से पश्चिमी सीमा पर भारत ने चौकसी बढ़ा दी है.

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रेगिस्तान में बॉर्डर की निगरानी के लिए बीएसएफ जवानों को मिले सैंड स्कूटर रेगिस्तान में बॉर्डर की निगरानी के लिए बीएसएफ जवानों को मिले सैंड स्कूटर

aajtak.in

  • जैसलमेर,
  • 05 सितंबर 2015,
  • अपडेटेड 9:12 PM IST

पाकिस्तान के सिंध में आतंकी संगठन जमात-उद-दावा के चीफ हाफिज सईद के लगातार दौरों और कश्मीर में पहली बार सिंध के आतंकी के पकड़े जाने से पश्चिमी सीमा पर भारत ने चौकसी बढ़ा दी है.

सैंड स्कूटर से की जा रही है रेगिस्तान में सीमा की निगरानी
पाकिस्तान ने आतंक की फैक्ट्री के लिए अब तक शांत पड़े सिंध में अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है तो भारत के लिए सबसे दुर्गम इलाके थार के रेगिस्तान में सुरक्षा चाक-चौबंद करना चुनौती बना हुआ है. पिछले एक महीने से भारत राजस्थान से लगती पाकिस्तान की 1072 किलोमीटर लंबी सीमा पर सुरक्षा को लगातार मजबूत करने में लगा है. इसके लिए सीमा पर जवानों को अब ऊंटों की जगह सैंड स्कूटर दिए जा रहे हैं.

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अमेरिका से मंगाए गए हैं सैंड स्कूटर
अमेरिका से आया पोलारिस के रेंजर सैंड स्कूटर पर बैठकर एक साथ 6 से 7 जवान किसी भी ऊंचे रेत के टीले पर चढ़ सकते हैं और घुसपैठियों को तेजी से पीछा भी कर सकते हैं.

राजस्थान सीमा से सटे इलाकों में बढ़ी पाक की गतिविधि‍यां
19, 20 और 21 जून को हाफि‍ज सईद ने भारत-पाकिस्तान की सीमा से लगे सिंध के इलाके मीरपुर खास में रैलियां कर खूब जहर उगला और उसके बाद अगस्त के अंतिम सप्ताह में हाफिज सईद ने सरहदी इलाके का दौरा एक बार फिर किया. इन इलाकों में आईएसआई और आतंकी संगठनों की अचानक बढ़ी गतिविधि‍यों की वजह से सीमा पर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है.

रेगिस्तान में गश्त नहीं है आसान
पाकिस्तान की लोनोवाला की लड़ाई की गद्दारी भला कौन भूल सकता है जब धोखे से रेगिस्तान का फायदा उठाकर भारतीय सीमा में अंदर तक घुस आए थे, लेकिन अब पाकिस्तान की किसी भी बेजा हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए जवान पूरी तरह से तैयार हैं. इस इलाके में गश्त करना आसान नही है. न तो सड़क बनाई जा सकती है और तारबंदी भी पूरी तरह से प्रभावी नहीं है. लिहाजा 1966 में भारतीय सेना ने ऊंटों को ट्रेनिंग देकर बीएसएफ को सौंपा ताकि रेगिस्तान में ऊंटों पर बैठकर सरहद की सुरक्षा की जा सके. लगातार चौबीसो घंटे बीएसएफ की टीम टुकड़ियों में ऊंटों पर बैठकर रखवाली करती है.

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