बिजली कंपनी BSES ने दिया दिल्ली सरकार को झटका, कहा- माली हालत खराब, 1 फरवरी से काटेंगे बिजली

दिल्लीवालों को 1 फरवरी से भारी बिजली कटौती की दिक्कत झेलनी पड़ सकती है. दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली निजी कंपनी बीएसईएस यमुना ने दिल्ली सरकार को चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी में कहा गया है कि कंपनी की आर्थिक हालत खस्ता है. ऐसे में 1 फरवरी से उन इलाकों में बिजली की कटौती हो सकती है जिन इलाकों में कंपनी बिजली की सप्लाई करती है.

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अरविंद केजरीवाल अरविंद केजरीवाल

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 जनवरी 2014,
  • अपडेटेड 1:40 PM IST

दिल्लीवालों को 1 फरवरी से भारी बिजली कटौती की दिक्कत झेलनी पड़ सकती है. दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली निजी कंपनी बीएसईएस यमुना ने दिल्ली सरकार को चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी में कहा गया है कि कंपनी की आर्थिक हालत खस्ता है. ऐसे में 1 फरवरी से उन इलाकों में बिजली की कटौती हो सकती है जिन इलाकों में कंपनी बिजली की सप्लाई करती है.

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रिलायंस इंफ्रा से जुड़ी बिजली वितरण कंपनी बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड ने चिट्ठी में कहा है कि आर्थिक तंगी की वजह से कंपनी बिजली नहीं खरीद सकती. कंपनी के मुताबिक पूर्वी दिल्ली के इलाकों में 8 से 10 घंटों की बिजली कटौती हो सकती है. जैसी जानकारी मिली है उसके मुताबिक जरूरत के बावजूद बीएईएस-यमुना करीब 500 मेगावाट बिजली नहीं खरीदेगी और इसकी भरपाई घंटों की कटौती से की जाएगी.

दिल्ली के विद्युत सचिव पुनीत गोयल को लिखे गए पत्र में बीएसईएस ने सरकार से तुरंत वित्तीय सहायता की मांग की है ताकि वह इस मुश्किल से निकल सके. कंपनी का कहना है कि उसके पास एनटीपीसी और एनएचपीसी सहित अन्य सरकारी उत्पादकों को देने के लिए धन नहीं है. कंपनी का कहना है कि बैंकों ने नयी फंडिंग वापस ले ली है और इसकी वजह से उसके लिए शहर के लिए बिजली जुटाना मुश्किल हो गया है.

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गौरतलब है बिजली कंपनियां दिल्ली सरकार के सस्ती बिजली देने के फैसले से खफा हैं. दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने अपने चुनावी वादों के मुताबिक सत्ता पर काबिज होने के कुछ दिनों बाद बिजली की दरों को आधा करने की घोषणा की थी. घोषणा के मुताबिक जो लोग 0 से 200 और 201 से 400 यूनिट तक बिजली खर्च करते हैं उनके रेट आधे कर दिए गए थे.

इसके अलावा बिजली वितरण कंपनियां केजरीवाल सरकार के उस फैसले से भी नाराज चल रही है जिसमें उसने कैग द्वारा कंपनियों के खाते की जांच कराए जाने के आदेश दिए हैं. कंपनियां इस फैसले के खिलाफ कोर्ट भी गई थीं लेकिन कोर्ट ने कैग जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

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