फिल्‍म समीक्षा: 'आशिकी-2' यानी पुराना वाला लव

बॉलीवुड में इन दिनों अतीत के सहारे बॉक्स ऑफिस की वैतरणी पार करने की कोशिशें की जा रही हैं. इस क्रम में नया नाम डायरेक्टर मोहित सूरी की 'आशिकी-2' का है. आइए जानते हैं फिल्म में क्या है खास

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नरेंद्र सैनी

  • नई दिल्ली,
  • 26 अप्रैल 2013,
  • अपडेटेड 9:50 PM IST

बजट: लगभग 12 करोड़ रु.
कलाकार: आदित्य रॉय कपूर, श्रद्धा कपूर, महेश ठाकुर और शाद रंधावा
डायरेक्टर: मोहित सूरी

शायद बॉलीवुड अभी अतीत की गोद में चढ़कर ही बॉक्स ऑफिस की वैतरणी पार करना चाहता है. पिछले दो-तीन हफ्ते से रिलीज हो रही फिल्मों से तो ऐसा ही लगता है. इस हफ्ते भट्ट कैंप की फिल्म 'आशिकी-2' ने दस्तक दी. फिल्म 1990 में आई आशिकी से एकदम अलग है. वह दौर उस तरह के प्रेम का था लेकिन यह दौर इस तरह के प्रेम का नहीं है जो 'आशिकी-2' में नजर आता है.

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आज जब हर कोई हीरो को लार्जर दैन लाइफ देखना चाहता है, ऐसे में 'आशिकी-2' का हीरो हमें कुछ-कुछ देवदास की याद दिलाता है. फिल्म का फर्स्ट हाफ अच्छा है, लेकिन दूसरा थोड़ा सुस्त और कन्फ्यूजिंग है. कहानी में नएपन की कमी है, गानों पर भट्ट कैंप की छाप एकदम साफ है. 'तुम ही हो' को छोड़कर बाकी गीत कुछ खास असर नहीं छोड़ते हैं.

कहानी में कितना दम
आरोही शिरके एक बड़ी गायिका बनना चाहती है और उसकी मुलाकात जाने-माने गायक राहुल जयकर से होती है. राहुल उसकी आवाज को सुनकर उसके करियर को एक मुकाम दिलाने में जुट जाता है. लेकिन इस सारे चक्कर में उसका करियर अपने हाथ से फिसलने लगता है. राहुल शराब औऱ हताशा के सागर में गुम हो जाता है, और फिर कहानी में कई प्रसंग दौड़ने लगते हैं. फिल्म की लेखिका शगुफ्ता रफीक इस प्रेम कहानी को नया टच देने में सफल नहीं रही हैं. फिल्म की कहानी हमें कुछ-कुछ अभिमान की याद दिलाती है. कहीं-कहीं ताजापन की कमी और अति भावुकता की ओवरडोज होती लगती है.

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स्टार अपील
आदित्य रॉय कपूर इससे पहले लंदन ड्रीम्स, गुजारिश और एक्शन रिप्ले में नजर आए थे, लेकिन कामयाबी उनके हाथ नहीं लगी थी. आशिकी-2 में वे पहली बार लीड रोल में हैं और उन्होंने फिल्म में बेहतरीन मूमेंट्स दिए हैं. स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी वाकई अच्छी लगती है. उन्हें नई हार्ट थ्रोब कहा जाए तो गलत नहीं होगा. श्रद्धा कपूर भी आरोही के रोल में जमी हैं. उनके चेहरे की मासूमियत खूब जमती है. खूबसूरत तो वह हैं ही. लेकिन ऐक्टिंग को लेकर उन्हें अभी और हाथ साफ करने होंगे.

कमाई की बात
फिल्म को देखने वालों में ज्यादा तादाद युवाओं की रहने वाली है. इस फिल्म का काफी कुछ न्यू जनरेशन के हाथों में है. लेकिन कमजोर कहानी के कारण फिल्म से बहुत बड़े चमत्कार की उम्मीद तो नहीं है. यह ट्राइड और टेस्टेड फॉर्मूला है. फिल्म लो बजट है, खतरे की संभावनाएं कम ही हैं. अगर लंबे समय से कोई रोमांटिक फिल्म देखना चाह रहा हो तो वीकेंड पर आशिकी-2 देखी जा सकती है.

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