महिला पुलिस अधिकारी ने ही आसाराम के दुर्ग पर चलाया था पहला तीर

आसाराम की गिरफ्तारी का बीड़ा उठाने वाली महिला पुलिस अधिकारी

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अासाराम अासाराम

संध्या द्विवेदी

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  • 25 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 10:05 PM IST

आसाराम के इंदौर आश्रम में खूब नाटक हुआ था जब एसीपी चंचल मिश्र के नेतृत्व में जोधपुर पुलिस का दस्ता डीआइजी राकेश गुप्ता की कमान में इंदौर पुलिस के साथ यहां आया था. दोनों पुलिस दस्तों के सामने दुविधा यह थी कि उन्हें आरोपी को भागने नहीं देना था और कानून के मुताबिक उससे पूछताछ करनी थी.

साथ ही यह भी देखना था कि भक्तों को कोई नुकसान न हो. डीआइजी गुप्ता ने बताया, हम खास तौर पर बाबा रामदेव के साथ रामलीला मैदान में हुई घटना को दोहराना नहीं चाहते थे. हमारा पूरा ध्यान इस बात पर था कि किसी भक्त को एक भी लाठी न लगे. दूर-दूर से आए 4,000 से अधिक भक्तों ने आश्रम को जाने वाली सड़कों पर हरी चटाइयां फैला दीं.

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अब पुलिस न तो आसाराम को लेकर उन पर से गुजर सकती थी और न ही जीप को आश्रम के भीतर ले जा सकती थी. पुलिस ने भी तीन दिन तक गूगल के नक्शों से आश्रम का चप्पा-चप्पा छाना था. उसने देखा कि एक सड़क ऐसी है जिस पर सिर्फ सेवक आते जाते हैं. वहां सादी वर्दी में पुलिस वाले तैनात कर दिए गए और बाकी सड़कों पर वर्दी में पुलिस वाले खड़े रहे.

रात को 11 बजे के आसपास सेवकों ने पुलिस की चाल भांप ली और वे तीसरी सड़क पर भी चटाइयां बिछाने लगे. अपनी चाल नाकाम होते देख इंदौर पुलिस ने जोधपुर पुलिस से कहा कि झटपट और सख्ती से काम निबटाए.

आसाराम ने कभी आत्महत्या की धमकी दी तो कभी खुद को कमरे में बंद कर लिया और फिर रात के खाने के लिए गायब हो गया. जानकार सूत्रों का कहना है कि वह इस उम्मीद में टाल मटोल कर रहा था कि शिकायत करने वाली लड़की के पिता को खरीदने में कामयाब हो जाएगा.

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आसाराम को यकीन नहीं हो रहा था कि उसके राजनैतिक भक्त उसे दगा दे देंगे. लेकिन सूत्रों का कहना है कि उसके तल्ख भाषणों का उलटा असर हुआ.

इंदौर का किला ढहने की एक वजह यह भी थी कि मीडिया दिन-रात पीछे लगा हुआ था. जब आसाराम को पता लग गया कि नरेंद्र मोदी ने साथ छोड़ दिया है तो उसने भोपाल से अहमदाबाद की उड़ान छोड़ दी. उसे जब यह लगा कि नई दिल्ली में राजनैतिक गलियारे के दरवाजे बंद हो चुके हैं तो वह इस उम्मीद में इंदौर भाग गया कि बड़ी संख्या में समर्थक बुलाकर कुछ वक्त निकाल लेगा.

पुलिस सूत्रों का कहना है कि जोधपुर की एसीपी चंचल ने अपने मजबूत इरादे के बल पर ही यह मामला सुलझाया, जब आसाराम ने खुद को कमरे में बंद कर लिया तो उन्होंने दरवाजा तोड़ने की धमकी दी.

एसीपी ने ठान लिया था कि चाहे जो हो जाए, आसाराम की गिरफ्तारी होगी और मुकदमे को अंजाम तक पहुंचाया जाएगा. आखिरकार किसी भी नजर से देखें, उसके पतन का कारण एक दमदार महिला अफसर ही बनी. इंदौर आश्रम के लिए दरवाजे बंद करने में बहुत देर हो चुकी है.     

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