भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन के बारे में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इसमें देश के विकास की जरूरतों को संतुलित किया गया है और भूमि मालिकों को ज्यादा मुआवजा देने की व्यवस्था की गई है.
भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधनों की आलोचना झेल रही सरकार का बचाव करते हुए जेटली ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि 2013 के कानून में 50 से अधिक गलतियां थीं और अध्यादेश के प्रावधानों का उपयोग उनमें से ज्यादातर कमियों को दूर करने में किया जाएगा. जेटली ने साल 2013 के कानून की एक गलती का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि अधिग्रहण के पांच साल बाद उपयोग नहीं होने पर भूमि लौटाने का प्रावधान है, जो गलत है.
जेटली ने कहा कि स्मार्ट शहर, टाउनशिप, औद्योगिक गलियारे, कारोबारी केंद्र, रक्षा परियोजनाएं, छावनी, बंदरगाह, परमाणु संस्थान, राजमार्ग का निर्माण, सिंचाई परियोजना, बांध निर्माण जैसी परियोजनाओं के पूरा होने में लंबा समय लगता है. उन्हें पांच साल में पूरा नहीं किया जा सकता. अधिग्रहीत जमीन डेवलपरों को दिए जाने के प्रावधान पर उन्होंने तर्क दिया कि कानून में कहा गया है कि अधिग्रहीत भूमि का कोई भी हिस्सा निजी शिक्षा संस्थानों या अस्पतालों के लिए उपयोग में नहीं लाया जाएगा.
-इनपुट IANS
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