अमर सिंह को नहीं मिला राज्‍यसभा का टिकट, आजम खान की बीवी ने ठुकराया

समाजवादी पार्टी ने अपने छह नेताओं को राज्‍यसभा में एंट्री दिलाने की कवायद शुरू कर दी है. हालांकि, अमर सिंह सपा के जरिये राज्‍यसभा का टिकट पाने में नाकाम रहे.

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अमर सिंह (फाइल फोटो) अमर सिंह (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्‍ली,
  • 31 अक्टूबर 2014,
  • अपडेटेड 7:34 PM IST

समाजवादी पार्टी ने अपने छह नेताओं को राज्‍यसभा में एंट्री दिलाने की कवायद शुरू कर दी है. हालांकि, अमर सिंह सपा के जरिये राज्‍यसभा का टिकट पाने में नाकाम रहे. वहीं, आजम खान की बीवी ने राज्‍यसभा टिकट की पेशकश ठुकरा दी है.

सपा के संसदीय बोर्ड ने आज जिन छह नामों की घोषणा की उनमें अमर सिंह का नाम नहीं है. सपा की तरफ से घोषित नामों में रामगोपाल यादव (इटावा), रवि प्रकाश वर्मा (खीरी), तजीन फातिमा (रामपुर), नीरज शेखर (बलिया), जावेद अली खान (संभल) और चंद्रपाल सिंह यादव (झांसी) शामिल हैं.

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तजीन सपा नेता और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री आजम खान की बीवी हैं. आजम ने राज्‍यसभा टिकट की पेशकश के लिए मुलायम सिंह यादव का शुक्रिया अदा किया है लेकिन वो अपनी बीवी के लिए राज्‍यसभा की सीट नहीं चाहते हैं. तजीन ने बयान जारी कर कहा है कि यह टिकट किसी दूसरे नेता को दे दिया जाए जो इसका हकदार है.

दिवंगत पीएम चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर इस बार लोकसभा चुनाव हार गए. ऐसे में उन्‍हें राज्‍यसभा के जरिये संसद भेजने की तैयारी है. सपा नेता चंद्रपाल सिंह यादव कृभको के चेयरमैन हैं.

कभी सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के सबसे करीबी रहे अमर सिंह की बीते अगस्‍त में मुलायम से हुई मुलाकात के बाद सियासी सरगर्मी तेज हो गई थी. ऐसा माना जा रहा था कि अमर सिंह की सपा में वापसी होगी. मुलायम-अमर की दोस्‍ती का सपा में ही विरोध भी शुरू हो गया था.

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याद रहे कि अमर सिंह ने चार साल पहले 6 जनवरी 2010 को समाजवादी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था. लेकिन 2 फरवरी 2010 को सपा प्रमुख मुलायम ने उन्हें पार्टी से बर्खास्त कर दिया. अमर सिंह कुछ दिनों तक राजनीतिक रूप से निष्क्रिय हो गए. लोगों ने कहा कि शायद यह उनके राजनीतिक करियर का अंत है. लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्होंने अपनी पार्टी बना ली और उसका नाम रखा 'राष्ट्रीय लोक मंच'. लेकिन यह पार्टी भी अमर सिंह का राजनीतिक वसंत नहीं लौटा सकी.

लोकसभा चुनाव ही उनकी आखिरी उम्मीद था. वह अपनी करीबी नेता जया प्रदा के साथ राष्ट्रीय लोक दल में शामिल हो गए. पार्टी ने उन्हें फतेहपुर सीकरी से चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन वहां भी उन्हें करारी हार नसीब हुई.

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