ने अपने बागी नेताओं की पार्टी से छुट्टी कर दी है. अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली पार्टी ने प्रशांत भूषण, , आनंद कुमार और अजीत झा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निकाल दिया है. AAP की राष्ट्रीय अनुशासन समिति ने एक बैठक के बाद यह फैसला लिया. AAP नेता दीपक वाजपेयी ने इसकी पुष्टि की है.
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रोफेसर आनंद कुमार ने कहा कि आम आदमी पार्टी अब सचिवालय तक सिमटकर रह गई है और पार्टी को कोयले और हीरे में फर्क नहीं पता. उन्होंने कहा कि यह फैसला इमरजेंसी की याद दिलाता है. AAP के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके आनंद ने कहा, 'यह आदर्शवादियों और अवसरवादियों की लड़ाई थी और अवसरवादियों के हाथ में अनुशासन का चाबुक था. पर इस फैसले से, चार लोगों के जाने से कोई बड़ा पहाड़ नहीं टूटेगा.'
गौरतलब है कि इन नेताओं को निकाले जाने के कयास 'स्वराज-संवाद' बैठक के बाद से ही लगाए जा रहे थे. बैठक के बाद पार्टी ने बागी नेताओं को जारी किया था. जवाब में प्रशांत भूषण ने सोमवार को खुद पर लगे आरोपों को खारिज किया और AAP सचिव पंकज गुप्ता पर ही पीएसी की इजाजत लिए बिना चंदा लेने का आरोप लगा दिया. पलटवार करते हुए भूषण ने आशीष खेतान पर एस्सार समूह से रिश्तों के आरोप लगाए.
चारों नेताओं के खिलाफ मुख्य आरोप बीते 14 अप्रैल को जिसमें स्वयंसेवियों से नई पार्टी गठित करने के बारे में राय ली गई थी. सूत्रों ने बताया कि योगेंद्र यादव पर एक पत्रकार को सूचना लीक करने और पार्टी नेतृत्व की कथित तौर पर छवि खराब करने का आरोप लगाया गया है.
याद रहे कि AAP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निकाले जाने के बाद योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और आनंद कुमार ने पार्टी के बागी नेताओं के साथ गुड़गांव में बैठक की थी. बैठक को 'स्वराज संवाद' का नाम दिया गया था.
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