उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में नाबालिग लड़कियों के साथ हो रहे अत्याचर पर आजतक के 'ऑपरेशन नरकलोक' का बड़ा असर हुआ है. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने इस पर संज्ञान लिया है. एनसीपीसीआर ने चित्रकूट के डीएम और उत्तर प्रदेश चाइल्ड राइट कमीशन को चिट्ठी लिखी है.
एनसीपीसीआर के चेयरमैन ने चित्रकूट के डीएम को तत्काल मामले की जांच करने को कहा है. इसके साथ ही एनसीपीआर की तरफ से इस मामले में एफआईआर करने के निर्देश भी दिए गए हैं.
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एनसीपीसीआर के मुताबिक एफआईआर दाखिल करने के बाद हमने चित्रकूट डीएम से रिपोर्ट भी मांगी है. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इसके साथ ही उत्तर प्रदेश चाइल्ड राइट प्रोटक्शन कमीशन से भी इस मामले में टीम भेजकर जांच करने को कहा है.
इस पूरे विवाद को लेकर बुधवार को चित्रकूट के डीएम शेषमणि पांडेय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि आजतक ने अपनी एक रिपोर्ट में लड़कियों के यौन शोषण की खबर दिखाई थी, जिसको हमने गंभीरता से लिया है. प्रशासन की ओर से मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं. इसके अलावा इस बारे में आजतक के संवाददाताओं से जानकारी ली गई है.
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डीएम ने कहा कि वीडियो सामने आने के बाद हमने बच्चियों से संपर्क किया है, बच्चियों ने अब यौन उत्पीड़न की घटना से इनकार किया है. लेकिन जब आजतक ने इस मसले पर सवाल पूछे तो डीएम आनन-फानन में प्रेस कॉन्फ्रेंस को खत्म करके चले गए. साफ है कि ऑपरेशन नरकलोक में जो सच्चाई दिखाई गई है, उसे स्वीकार करने से प्रशासन इनकार कर रहा है और मामले की लीपापोती में जुट गया है.
दरअसल, बुंदेलखंड के चित्रकूट में चंद रुपयों के लिए खनन के धंधे में लगे कुछ लोग मासूम बच्चियों का शोषण कर रहे थे. गरीबी के मारे इन अभागे लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर सौ-डेढ़ सौ रुपये की मजदूरी देने के बदले कुछ दरिंदे चित्रकूट की इन मासूम बच्चियों का शोषण कर रहे थे.
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आजतक की रिपोर्ट के बाद कई अफसर देर रात को ही उस स्थान पर पहुंचे. यहां पुलिस का जमावड़ा लग गया और मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया गया है. सोशल मीडिया पर लोगों की ओर से इसमें एक्शन लेने की मांग की गई है.
आशुतोष मिश्रा