गुजरातः निलंबित आईपीएस संजीव भट्ट को जमानत

गुजरात दंगों के मामले में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को फंसाने के लिए झूठे साक्ष्य गढ़ने के आरोप में गिरफ्तार किये गये निलंबित आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को एक स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी.

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संजीव भट्ट संजीव भट्ट

भाषा

  • अहमदाबाद,
  • 17 अक्टूबर 2011,
  • अपडेटेड 2:36 PM IST

गुजरात दंगों के मामले में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को फंसाने के लिए झूठे साक्ष्य गढ़ने के आरोप में गिरफ्तार किये गये निलंबित आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को एक स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी.

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सत्र न्यायाधीश वी के व्यास ने इस शर्त पर जमानत दी कि भट्ट जांच में सहयोग करेंगे और जब बुलाया जाए तो अदालत में मौजूद होंगे.

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संजीव भट्ट की गिरफ्तारी गलतः अन्ना | फोटो
भट्ट को पुलिस कांस्टेबल के डी पंत द्वारा दाखिल एक प्राथमिकी के मामले में 30 सितंबर को गिरफ्तार करने के बाद जेल भेजा गया था. पंत ने भट्ट पर उसे धमकाने और गोधरा कांड के बाद 27 फरवरी 2002 को मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई बैठक में भट्ट की मौजूदगी के संबंध में झूठे हलफनामे पर दस्तखत कराने का आरोप लगाया था.

'संजीव भट्ट के साथ आतंकियों जैसा सलूक हुआ'
भट्ट ने तीन अक्तूबर को जमानत अर्जी दाखिल की थी जिसका राज्य सरकार ने विरोध किया था.

भट्ट की जमानत अर्जी पर हफ्ते भर चली सुनवाई के दौरान उनके वकील आई एच सैयद ने दलील दी थी कि उनके मुवक्किल की गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित है और उसका मकसद 2002 के सांप्रदायिक दंगों के संबंध में उनके पास मौजूद मोदी के खिलाफ साक्ष्यों को नष्ट करना था.

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सैयद ने कहा था कि जिस शिकायत पर भट्ट को गिरफ्तार किया गया था वह कुछ राजनेताओं और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के कहने पर गलत तरह से की गयी थी.

सैयद के अनुसार ऐसा लगता है कि भट्ट पर धमकाने का आरोप लगाने वाला शिकायतकर्ता के डी पंत प्रदेश सरकार के राजनीतिक ओहदेदारों के कहने पर काम कर रहा है. उन्होंने कहा था कि आईपीसी की जिन धाराओं के तहत भट्ट पर मामला दर्ज किया गया है उनमें से अधिकतर जमानती हैं और इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए.

प्रदेश सरकार के वरिष्ठ वकील एस वी राजू ने भट्ट की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए दलील दी थी कि भट्ट को जमानत नहीं दी जा सकती क्योंकि वह आदतन अपराधी हैं और उनका आपराधिक इतिहास रहा है.

राजू ने अपने दावों के समर्थन में भट्ट के खिलाफ अनेक अदालतों में कुछ अन्य आपराधिक मामलों का जिक्र किया. जिनमें 1994 में पोरबंदर में पुलिस हिरासत में उत्पीड़न का मामला और एनडीपीएस कानून के तहत 1996 से राजस्थान के पाली में लंबित एक मामला है.

राजू ने यह भी कहा कि प्रथमदृष्टया भट्ट के खिलाफ मामला बनता है जिसमें उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है.

उन्होंने आरोप लगाया कि भट्ट ने अपने खिलाफ मामले में जांच में सहयोग नहीं देकर प्रक्रिया से बचने का प्रयास किया और चार बार समन भेजे जाने के बावजूद जांचकर्ता अधिकारी के समक्ष पेश नहीं हुए हैं. उन्होंने भट्ट पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया.

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राजू ने यह आरोप भी लगाया था कि गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अजरुन मोधवाडिया भट्ट के साथ अपराध में शामिल थे.

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