अलविदा 2014: ISRO के लिए Rocketing रहा यह साल

भारत ने साल 2014 में वैसे तो कई उपलब्धियां हासिल कीं, लेकिन देश के वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में जो सफलता मिली, उसने पूरी दुनिया में हमारा डंका बजा दिया.

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Narendra modi Narendra modi

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 दिसंबर 2014,
  • अपडेटेड 7:10 PM IST

भारत ने साल 2014 में वैसे तो कई उपलब्धियां हासिल कीं, लेकिन देश के वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में जो सफलता मिली, उसने पूरी दुनिया में हमारा डंका बजा दिया. इस साल भारत ने न सिर्फ सबसे ज्यादा संख्या में रॉकेटों और उपग्रहों का प्रक्षेपण किया बल्कि टेक्नोलॉली के लिहाज से भी भारत ने पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाया.

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) ने कई क्षेत्रों में विकास और अनुभव को साबित करते हुए इंटर-प्लैनेटरी उड़ानें भेजीं तो क्रायोजेनिक इंजन टेस्ट भी किए. इसरो ने सर्वाधिक क्षमता वाले और सबसे भारी रॉकेट का परीक्षण भी इस साल किया और मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की दिशा में छोटा ही सही पर बेहद अहम कदम बढ़ा दिया.

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2014 की सफलताओं के बारे में इसरो अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने कहा, 'यह साल बहुत ही शानदार वर्ष रहा. हमारी शुरुआत ही जीएसएलवी रॉकेट के सफल प्रक्षेपण के साथ हुई. इसके अलावा हमने दो नौवहन उपग्रहों का भी प्रक्षेपण किया. हमारा मंगलयान मिशन भी बेहद सफल रहा. हमने अब तक के सबसे भारी जीएसएलवी रॉकेट मार्क-3 के परीक्षण में भी सफलता पाई. साथ ही हमने स्पेस में मैन मिशन प्रोग्राम की तरफ भी कदम बढ़ा दिया है.

मार्क-3 रॉकेट के अन्य इंजन तैयार हो चुके हैं, इसलिए इसरो ने इसके साथ चार टन वाले मानवयुक्त अंतरिक्षयान के मॉड्यूल का परीक्षण करने का निर्णय किया. 155 करोड़ रुपये की लागत वाले इस अंतरिक्ष कार्यक्रम का दो अहम लक्ष्य हैं. पहला तो रॉकेट की पर्यावरणीय क्षमताओं का परीक्षण और दूसरा चार टन वाले मैन स्पेसक्राफ्ट के प्रक्षेपण का परीक्षण.

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इस मानव अंतरिक्षयान मॉड्यूल में किसी जीवित प्राणी को नहीं भेजा गया था, हालांकि यह भविष्य में मानव को अंतरिक्ष में भेजने की भारत की योजना का हिस्सा था.

भारी संचार उपग्रह प्रक्षेपित करने के उद्देश्य से तैयार जीएसएलवी रॉकेट से मानव अंतरिक्षयान मॉड्यूल के प्रक्षेपण के औचित्य पर पूछे गए सवाल के जवाब में राधाकृष्णन ने कहा, 'इसरो के प्रोजेक्ट एक-दूसरे से इतने अलग नहीं हैं. भारी रॉकेट के लिए क्रायोजेनिक इंजन को विकसित किया जा रहा है और उड़ान भरने के लिए तैयार होने में इसे दो वर्ष और लगेंगे.

भारत ने 2014 में कुल आठ उपग्रहों को प्रक्षेपित किया, जिसमें तीन भारतीय उपग्रह थे, जबकि पांच विदेशी. सारे उपग्रह इसरो के श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण स्थल से प्रक्षेपित किए गए. भारतीय उपग्रहों में दो नौवहन और एक संचार उपग्रह है.

भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह जीसैट-16 यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के आरियान-5 रॉकेट के जरिए 7 दिसंबर को छोड़ा गया. राधाकृष्णन ने बताया कि इसी वर्ष एक और नौवहन उपग्रह भी छोड़ा जाना था, लेकिन उसे प्रक्षेपित नहीं किया जा सका.

2014 में ये रहे गौरव के क्षण
- पहली बार पूर्णत: स्वदेश निर्मित क्रायोजेनिक इंजन वाले जीएसएलवी रॉकेट का सफल प्रक्षेपण.
- दो नौवहन उपग्रह कक्षा में स्थापित किए गए.
- मंगलयान मंगल की कक्षा में पहुंचा.
- देश के सबसे भारी जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट के प्रक्षेपण का सफल परीक्षण.
- मानव अंतरिक्षयान मॉड्यूल के प्रक्षेपण का सफल परीक्षण.
- फ्रांस के भू पर्यवेक्षण उपग्रह एसपीओटी-7 के साथ चार अन्य छोटे उपग्रहों, जर्मनी के एआईएसएटी, कनाडा के एनएलएस-7.1, कनाडा के एनएलएस-7.2 और सिंगापुर के वीईएलओएक्स-1 का सफल वाणिज्यिक प्रक्षेपण.
- अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के साथ पृथ्वी के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार) अभियान के लिए समझौता हुआ.

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