शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहती है बीजेपी, दिवाली बाद बनेगी बात

क्या महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए बीजेपी-शिवसेना साथ आएंगे, इसे लेकर सस्पेंस बरकरार है. हालांकि शिवसेना के सूत्रों के हवाले से ऐसी खबर आई है कि जिसने एक बार फिर गठबंधन के कयासों को बल दे दिया है. शिवसेना के सूत्रों का कहना है कि बीजेपी उनके साथ गठबंधन करने की इच्छुक है. दिवाली के बाद इस पर फैसला हो सकता है.

Advertisement
अमित शाह और उद्धव ठाकरे अमित शाह और उद्धव ठाकरे

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 अक्टूबर 2014,
  • अपडेटेड 7:06 AM IST

क्या महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए बीजेपी-शिवसेना साथ आएंगे, इसे लेकर सस्पेंस बरकरार है. हालांकि शिवसेना के सूत्रों के हवाले से ऐसी खबर आई है कि जिसने एक बार फिर गठबंधन के कयासों को बल दे दिया है. शिवसेना के सूत्रों का कहना है कि बीजेपी उनके साथ गठबंधन करने की इच्छुक है. दिवाली के बाद इस पर फैसला हो सकता है. राजनाथ से मिले बिना मुंबई लौटे दूत

Advertisement

हालांकि, बुधवार सुबह दोनों पार्टी के बीच गठबंधन पर उस वक्त सस्पेंस गहरा गया, जब शिवसेना नेता अनिल देसाई और सुभाष देसाई बीजेपी नेता राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा से बिना मिले मुंबई लौट गए. दरअसल शिवसेना ने इन दोनों नेताओं को आगामी सरकार पर बातचीत करने की कमान सौंपी है. दोनों नेता मंगलवार को ही दिल्ली आए थे. हालांकि वे किसी से मिले बिने मुंबई से लौट गए. इसके बाद दोनों ने मातोश्री जाकर शिवसेना प्रमुख से बात की.

सूत्र बताते हैं कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच पर्दे के पीछे भी बातचीत हो रही है. ऐसे में शिवसेना के इन नेताओं को कोई संदेश उद्धव तक पहुंचाना होगा, इस वजह से वे वापस लौट गए.

बीजेपी का प्लान
बीजेपी सूत्र बताते हैं कि पार्टी शिवसेना और उद्धव ठाकरे पर दबाव बनाए रखना चाहती है ताकि वे अपनी उम्मीदों को कम करें. बीजेपी को लगता है कि सत्ता में भागीदारी को लेकर उद्धव पर शिवसेना कार्यकर्ताओं का जबरदस्त दबाव है. बीजेपी ने मध्यस्थता करने वाले अपनी पार्टी के नेताओं को सलाह दी है कि वे विन्रम रहें लेकिन अनुचित मांगों के सामने बिल्कुल ना झुकें. अगर शिवसेना से गठबंधन नहीं हो पाता है तो पार्टी महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक सरकार चलाने को तैयार है, जिसे निर्दलीय और बाहर से एनसीपी का समर्थन प्राप्त रहेगा. बीजेपी आलाकमान को लगता है कि शरद पवार का बाहर से समर्थन देने का ऐलान एक राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक है, इस फैसले ने शिवसेना की सौदेबाजी की ताकत को कम कर दी.

Advertisement

शिवसेना की मांग
सूत्र बताते हैं कि शिवसेना चाहती है कि सरकार 1995 के गठबंधन के उस फॉर्मूले पर ही बने. इस फॉर्मूले के मुताबिक बड़े दल का मुख्यमंत्री और छोटे दल का उप मुख्यमंत्री बनना तय किया गया था. साथ ही गृह, वित्त, सिंचाई, पीडब्लूडी और ग्रामीण विकास जैसे मंत्रालय भी शिवसेना के खाते में आने की बात थी. लेकिन अब के हालात में शिवसेना की कितनी बात मानी जाएगी, इसका संकेत भी ओम माथुर दे चुके हैं. उन्होंने कहा था, '1995 का फॉर्मूला दिया गया था तो ना हम थे ना उद्धव थे. समझदार वर्तमान स्थिति को ध्यान रखता है.'

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement