विंबलडन 2017: क्यों नाराज हैं फेडरर और जोकोविच जैसे खिलाड़ी

विंबलडन सबसे प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम मुकाबलों में एक है. लेकिन साल 2017 का विंबलडन कुछ फीका सा दिखाई दे रहा है. अब तक कई अनफिट और चोटिल खिलाड़ियों मैदान छोड़ चुके हैं.

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रोजर फेडरर और नोवाक जोकोविच रोजर फेडरर और नोवाक जोकोविच

अमित रायकवार

  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 1:05 PM IST

विंबलडन सबसे प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम मुकाबलों में एक है. लेकिन साल 2017 का विंबलडन कुछ फीका सा दिखाई दे रहा है. अब तक कई अनफिट और चोटिल खिलाड़ियों मैदान छोड़ चुके हैं. आखिर इस विंबल्डन में ऐसा क्या हो कि एकाएक अनिफट खिलाड़ियों की फेहरिस्त बढ़ गई है. चोटिल खिलाड़ियों की वजह से रोजर फेडरर और नोवाक जोकोविच जैसे खिलाड़ी नाराज हैं. इतना ही नहीं फैंस अभी अपने आपको ठगा हुआ सा महसूस कर रहे हैं.

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चलिए हम आपको बताते हैं आखिर क्यों विंबलडन में चोटिल खिलाड़ी आ गए हैं. दरअसल इस साल विंबलडन इनामी राशि में बढ़ाई गई है. इसलिए पैसों के लालच की वजह से ज्यादा खिलाड़ी ज्यादा खेल रहे हैं. पिछले साल के मुकाबले इस बार खिलाड़ियों को करीब पांच लाख रुपये ज्यादा मिल रहे हैं.

सेंटर कोर्ट पर रोजर फेडरर और नोवाक जोकोविच का मैच देखने करीब 15 हजार दर्शक पहुंचे थे. लेकिन इनके विरोधी खिलाड़ी एलेक्सांद्र जोग्लोपोलोव और मार्टिन क्लिजान ने 70 मिनट के अंदर ही मुकाबले से हटने का फैसला ले लिया. यानि इन दोनों खिलाड़ियों को 70 मिनट के 25 लाख की कमाई कर ली. जो पहला राउंड खेलने पर मिली है. जानकारों की माने तो ऐसे रवैये से न तो सिर्फ फिट खिलाड़ियों को मुख्य ड्रॉ में जगह मिली. बल्कि फैंस को भी निराश होना पड़ा है.

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विंबलडन से हटने वाले खिलाड़ियों की सूची में बुधवार को फेलिसियानों लोपेज का नाम भी जुड़ गया. पहले दिन ऑस्ट्रेलिया के निक किर्गियोस ने कूल्हे की चोट ठीक नहीं होने के कराण नाम वापिस लिया. इसके डेनिस इस्तोमिन और विक्टर ट्रोएकी और फिर क्लिजान तथा जोगलोपोलोव, जांको टिपसरेविच भी अपने पहले दौर के मुकाबले छोड़ दिये.

पहले राउंड में हारने वाले खिलाड़ियों को भी इस साल 35 हजार पाउंड मिलेगे. जो रिटार्ड खिलाड़ियों की बढ़ती वजह मानी जा रही है. फेडरर के मुताबित यह पैसा काफी है. ग्रैंड स्लैम में भी एटीपी प्रणली लागू होनी चाहिए एटीपी स्तर पर यदि आप नहीं खेलते हो तब भी आपको साल में दो बार राशि मिलती है. शायद इससे चोटिल खिलाड़ियों की सूची कम हो जाए.

 

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