अर्पिंदर सिंह ने पुरुषों की त्रिकूद (ट्रिपल जंप) में 16.77 मीटर कूद लगाकर एशियाई खेलों की इस स्पर्धा में भारत को पिछले 48 वर्षों में पहला स्वर्ण पदक दिलाया. राष्ट्रमंडल खेल 2014 में कांस्य पदक जीतने के बाद किसी बड़ी प्रतियोगिता में पदक नहीं जीत पाने वाले अर्पिंदर ने अपने तीसरे प्रयास में सर्वश्रेष्ठ कूद लगाई. उज्बेकिस्तान के रसलान कुर्बानोव ने 16.62 मीटर कूद लगाकर रजत और चीन के शुओ काओ ने 16.56 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता.
एथलीट अर्पिंदर के बाद हेप्टाथलन में स्वप्ना ने भारत को दिलाया 11वां गोल्ड
अर्पिंदर ने हालांकि सत्र में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 17.09 मीटर से कमतर प्रदर्शन किया. उन्होंने जून में राष्ट्रीय अंतरराज्यीय चैंपियनशिप के दौरान यह दूरी पार हासिल की थी, जिससे वह एशियाई रैंकिंग में तीसरे नंबर पर आ गए थे. अर्पिंदर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 17.17 मीटर है. वह 2014 एशियाई खेलों में पांचवें स्थान पर रहे थे.
भारत के लिए इससे पहले एशियाई खेलों की त्रिकूद में आखिरी स्वर्ण पदक 1970 में मोहिंदर सिंह गिल ने जीता था. कुल मिलाकर यह त्रिकूद में भारत का तीसरा स्वर्ण पदक है. मोहिंदर सिंह ने 1958 में पहली बार इस स्पर्धा में सोने का तमगा हासिल किया था.
यही नहीं, 1982 में एस बालसुब्रह्मण्यम के कांस्य पदक के बाद यह भारत का एशियाई खेलों में त्रिकूद में पहला पदक भी है. इसी स्पर्धा में भाग ले रहे भारत के एक अन्य एथलीट ए वी राकेश बाबू 16.40 मीटर की कूद लगाकार छठे स्थान पर पहुंच गए.
विश्व मोहन मिश्र