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3 बच्चों की मां मेरीकॉम, 35 की उम्र में छठी बार बनीं वर्ल्ड चैम्पियन

तरुण वर्मा
  • 24 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 6:11 PM IST
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भारत की दिग्गज मुक्केबाज एमसी मेरीकॉम ने छठा वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया है. मेरीकॉम ने शनिवार को AIBA वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप के 10वें संस्करण में 48 किलोग्राम भारवर्ग का खिताब अपने नाम कर लिया. मेरीकॉम ने फाइनल में यूक्रेन की हना ओखोटा को 5-0 से मात देते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया.

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मेरीकॉम का यह छठा वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप खिताब है, तो वहीं मेरीकॉम ने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कुल 7वां पदक अपने नाम किया है. इसमें 6 गोल्ड के अलावा 1 सिल्वर मेडल शामिल हैं.

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सबसे बड़ी बात यह है कि तीन बच्चों की मां एमसी मेरीकॉम 35 साल की उम्र में छठी बार वर्ल्ड चैंपियन बनीं हैं. आमतौर पर इस उम्र में खिलाड़ी अपने करियर को अलविदा कह देते हैं, लेकिन ने अपनी फिटनेस से हर मुश्किल को आसान कर दिया.

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35 साल की उम्र में भी बॉक्सिंग रिंग के अंदर मेरीकॉम की फिटनेस और तेजी देखने लायक है. विरोधी पर मेरीकॉम पंच की बरसात करती हैं और बहुत ही तेजी से खुद को उनके प्रहारों से बचाती भी हैं.

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गोल्ड मेडलों की चमक हासिल करने के लिए मेरीकॉम जीतोड़ कड़ी मेहनत करती हैं. वो शिद्दत से मुक्केबाजी की ट्रेनिंग करती हैं. मेरीकॉम को 'सुपरमॉम' के नाम से भी जाना जाता है.

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35 वर्षीय मेरीकॉम के तीन बच्चे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने बॉक्सिंग करना नहीं छोड़ा. उनकी फिटनेस देखकर कोई नहीं कह सकता कि वो तीन बच्चों की मां हैं.

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मेरीकॉम का जन्म 1 मार्च 1983 को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में हुआ. उनके पिता एक गरीब किसान थे. मैट्रिकुलेशन की परीक्षा पास नहीं होने के कारण स्कूल छोड़ दिया और फिर आगे की पढाई ‘नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ ओपन स्कूलिंग’, इम्फाल, से की.

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मेरीकॉम ने अपना स्नातक चुराचांदपुर कॉलेज से पूरा किया. उनको खेल-कूद का शौक बचपन से ही था और उनके ही प्रदेश के मुक्केबाज डिंग्को सिंह की सफलता ने उन्हें मुक्केबाज बनने के लिए और प्रोत्साहित कर दिया.

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पूर्व में मैरी कॉम एथलीट थीं. उनके भीतर बॉक्सिंग का शौक 1999 में उस समय उत्पन्न हुआ जब उन्होंने खुमान लम्पक स्पो‌र्ट्स कॉम्प्लेक्स में कुछ लड़कियों को बॉक्सिंग रिंग में लड़कों के साथ बॉक्सिंग के दांव-पेंच आजमाते देखा.

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1998 में मणिपुर के बॉक्सर डिंगको सिंह ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था. इससे मेरी कॉम को बहुत प्रेरणा मिली. मेरीकॉम ने जब बॉक्सिंग शुरू की थी, तो उन्हें अपने घर से समर्थन नहीं मिला था. घर वाले मेरीकॉम के बॉक्सिंग के खिलाफ थे, लेकिन कड़ी मेहनत और लगन ने उनके घर वालों को भी मना लिया.

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मेरीकॉम ने 2000 में अपना बॉक्सिंग करियर शुरू किया था और तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद खुद को न केवल स्थापित किया बल्कि कई मौकों पर देश को भी गौरवान्वित किया. 2008 में इस महिला मुक्केबाज को 'मैग्नीफिशेंट मैरीकॉम' की उपाधि दी गई.

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2001 में मेरीकॉम की दोस्ती ओन्लर कॉम से हुई जोकि दिल्ली यूनिवर्सिटी में लॉ की पढ़ाई कर रहे थे. दोनों की दोस्ती 4 सालों तक चली. 2005 में दोनों ने शादी कर ली.

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मेरी कॉम के जीवन पर फिल्म भी बनी है. 2014 में उनके जीवन पर आधारित फिल्म का नाम 'मेरी कॉम' था. प्रियंका चोपड़ा ने उसमें मुख्य भूमिका निभाई थी.

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