वीरेंद्र सहवाग के लिए 3 नवंबर खास है. आज ही उन्होंने 2001 में टेस्ट क्रिकेट में ड्रीम डेब्यू किया था. उन्होंने ब्लोमफोन्टेन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपनी पहली ही टेस्ट पारी में शतक जड़ा था. छठे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने न सिर्फ 19 चौकों के सहारे 105 रन बनाए, बल्कि सचिन तेंदुलकर के साथ पांचवें विकेट के लिए 220 रनों की साझेदारी की. भारत वह मैच 9 विकेट से जरूर हार गया, लेकिन टेस्ट क्रिकेट को एक नया सितारा मिल गया था.
टेस्ट मैचों में आने से पहले वनडे मैचों में अपनी छाप छोड़ चुके थे. सहवाग 1999 में वनडे करियर की शुरुआत कर चुके थे. उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में सचिन तेंदुलकर के 'क्लोन' की परिभाषा से बाहर आकर खुद की पहचान गढ़ी. 2 अगस्त 2001 को न्यूजीलैंड के खिलाफ 69 गेंदों पर शतक जड़ चुके सहवाग को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत करने का मौका मिला था.
विरोधी गेंदबाजों में डर पैदा करने वाले के जीवन का अहम लम्हा 2004 में आया, जब उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान में 309 रनों की पारी खेली और टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में तिहरा शतक जड़ने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बनने के साथ ही 'मुल्तान के सुल्तान' का उपनाम भी पाया.
इसके चार साल बाद ही ने चेन्नई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नाबाद 319 रनों की पारी खेली इस पारी में सहवाग ने महज 278 गेंदों में तिहरा शतक जड़ डाला, जो टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का सबसे तेज तिहरा शतक है. सहवाग टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में दो तिहरे शतक जड़ने वाले महज चार बल्लेबाजों में सहवाग भी एक हैं.
अपने 12 साल के टेस्ट करियर के दौरान छह दोहरे शतक जड़ने वाले सहवाग ने सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गज बल्लेबाजों के बीच सॉलिड इंडियन ओपनर के रूप में पूरे विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई. सहवाग ने 104 टेस्ट में 49.34 की औसत से 8586 रन बनाए. जिनमें उनके 23 शतक और 32 अर्धशतक शामिल हैं.
विश्व मोहन मिश्र