Sushila Meena: 'जहीर जैसा एक्शन और तूफानी बॉलिंग...', 12 साल की सुशीला मीणा के फैन बने सचिन तेंदुलकर, VIDEO

'क्रिकेट के भगवान' सचिन तेंदुलकर भी सुशीला मीणा के फैन बन गए हैं. सचिन तेंदुलकर ने 12 साल की सुशीला का वीडियो शेयर किया है. सुशीला एक गरीब परिवार से आती हैं. सुशीला के माता-पिता मजदूरी और खेती करके गुजरा करते हैं.

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Sushila Meena Sushila Meena

संजय जैन

  • प्रतापगढ़ (राजस्थान),
  • 20 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 7:20 PM IST

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की धरियावद तहसीन के एक छोटे से गांव रामेर तालाब की रहने वाली सुशीला मीणा रातों रात सोशल मीडिया पर छा गईं. पांचवी कक्षा की छात्रा सुशीला मीणा की गेंदबाजी का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. सुशीला बाएं हाथ से तेज गेंदबाजी करती हैं और उनका एक्शन टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान से मिलता-जुलता है.

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सचिन भी हुए सुशीला के मुरीद

'क्रिकेट के भगवान' सचिन तेंदुलकर भी सुशीला मीणा के फैन बन गए हैं. सचिन तेंदुलकर ने सुशीला का वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो गेंदबाजी करती दिख रही हैं. सचिन ने लिखा, "सहज, सहज और देखने में प्यारा. सुशीला मीणा के गेंदबाजी एक्शन में आपकी झलक मिलती है जहीर खान. क्या आपने भी इसे देखा है."

आजतक ने सुशीला मीणा के माता-पिता से खास बातचीत की. साथ ही सुशीला के कोच और शिक्षक ईश्वरलाल मीणा से भी जानकारी ली. सुशीला मीणा एक गरीब परिवार से आती हैं. इनके पिता का नाम रतनलाल मीणा और मां का नाम शांति बाई मीणा हैं. सुशीला के माता-पिता मजदूरी और खेती करके गुजरा करते हैं. सुशीला के गांव में करीब 250 मकान हैं, जो साल 1980 में कडाणा बांध (गुजरात) के डूब क्षेत्र से आए.

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सुशीला के परिवार को प्रशासन से मदद की आस

परिवार को उम्मीद है कि 12 साल की सुशीला मीणा आगे चलकर अपने नाम देश का नाम रोशन करेंगी. इसके लिए उन्हें प्रशासन की ओर से मदद की उम्मीद है, जिससे सुशीला को नई ऊंचाई मिले. सुशीला मीणा पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट के खेल में बहुत ही रुचि रखती है. गुलाब सिंह मीणा कहते हैं कि गांव के अधिकतर लोग मजदूर हैं.

गांव के ज्यादातर लोग गुजरात और महाराष्ट्र में मजदूरी कर अपने घर का गुजारा करते हैं. गुलाब सिंह का कहना है कि सामुदायिक भवन होना चाहिए, जिससे गांव को लाभ मिलेगा. गुलाब सिंह का कहना है कि इस गांव में एक खेल का मैदान रहना भी काफी जरूरी है. गुलाब सिंह कहते हैं कि यहां प्रतिभाएं उभर कर सामने आ रही हैं, ऐसे में इसे राजस्व गांव का दर्जा दिलाया जाए और प्रशासन की ओर से मदद मिले.

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