बहिष्कार भी फेल, शर्तें भी खारिज, फिर... नकवी ने खुद खोला पाकिस्तान के यू-टर्न का सीक्रेट

बांग्लादेश के समर्थन में लिए गए सख्त रुख, ICC से चली लंबी बातचीत और अंततः खारिज की गई PCB की मांगों ने इस पूरे प्रकरण को क्रिकेट से ज्यादा राजनीति और दबाव की कहानी बना दिया है- जहां अंत में खेल तो होगा, लेकिन PCB की असहजता साफ नजर आती है.

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नकवी के शब्दों में PCB का सच. (Photo, Getty) नकवी के शब्दों में PCB का सच. (Photo, Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:18 PM IST

टी20 वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर चला सियासी और क्रिकेटीय ड्रामा आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंच गया. पाकिस्तान ने अपने पहले के कड़े रुख से पीछे हटते हुए 15 फरवरी को भारत के खिलाफ ग्रुप मैच खेलने की पुष्टि कर दी. लेकिन यह फैसला जितना औपचारिक दिखता है, उसके पीछे उतनी ही असहज कहानी भी छुपी है- जिसका चेहरा बने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी.

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पाकिस्तान सरकार ने पहले भारत के खिलाफ मैच खेलने से इनकार किया था. इसकी वजह बताई गई थी बांग्लादेश के समर्थन में एकजुटता, जिसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने टूर्नामेंट से बाहर कर दिया था. PCB ने भी उसी लाइन पर चलते हुए भारत मुकाबले के बहिष्कार की बात कही थी. मगर जैसे-जैसे समय बीता, दबाव बढ़ता गया- और वही दबाव आखिरकार यू-टर्न में बदल गया.

पर्दे के पीछे क्या बदला?

पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान, बांग्लादेश, ICC और अन्य क्रिकेट बोर्ड (जिसमें यूएई और श्रीलंका भी शामिल थे) के बीच लगातार बातचीत हुई. इन्हीं चर्चाओं के बाद सोमवार को पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर अपना रुख बदल लिया.

दिलचस्प बात यह रही कि आधिकारिक घोषणा से ठीक पहले PSL की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोहसिन नकवी से सीधे सवाल पूछे गए. प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म होने के बाद एक इंटरव्यू में उनसे ‘बायकॉट’ और ICC से बातचीत को लेकर अंदरूनी जानकारी मांगी गई. नकवी के जवाबों ने यू-टर्न की पटकथा लगभग साफ कर दी.

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- नकवी ने कहा, 'बस अब थोड़ी देर में फैसला हो जाएगा.' 

- जब उनसे पूछा गया कि क्या कोई अच्छी खबर आने वाली है, तो उनका जवाब था- 
'हम तो हर वक्त अच्छी खबर ही देते हैं.'

- नकवी ने कहा.'आपने बांग्लादेश का बयान देखा होगा. बांग्लादेश ने ही पाकिस्तान से अनुरोध किया है कि हम यह मैच खेलें. यह साफ संकेत है कि उनका पूरा मामला सुलझ चुका है, तभी उन्होंने यह मांग रखी है.'

- 'क्या इस पूरे विवाद में पाकिस्तान ने अपने लिए कुछ हासिल भी किया?'  इस पर उनका जवाब था-
'हमने बांग्लादेश के लिए स्टैंड लिया था… हमने अपने लिए कुछ नहीं किया.'

नकवी ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की ओर से खुद पाकिस्तान से मैच खेलने का अनुरोध आया था, जिससे यह साफ होता है कि उनका मामला ICC के साथ सुलझ चुका है. लेकिन इसी बयान ने PCB के पूरे रुख को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया- अगर कुछ हासिल ही नहीं हुआ, तो इतना कड़ा रुख क्यों अपनाया गया?

ICC का साफ संदेश

हफ्तों चले इस विवाद के बाद ICC ने भी बयान जारी कर साफ कर दिया कि टूर्नामेंट की गरिमा और प्रतिबद्धता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. ICC ने कहा कि सभी सदस्य देशों ने टूर्नामेंट की शर्तों के अनुसार खेलने और आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने पर सहमति जताई है.

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सूत्रों के मुताबिक PCB की तीन प्रमुख मांगों को ICC ने खारिज कर दिया, जिनमें भारत के खिलाफ द्विपक्षीय सीरीज दोबारा शुरू करने की मांग भी शामिल थी. यानी जिस सख्ती के साथ बहिष्कार की बात कही गई थी, उसका नतीजा लगभग शून्य रहा.

सियासत बनाम क्रिकेट... और अंत में मैदान

भारत-पाकिस्तान मुकाबला हमेशा से सिर्फ क्रिकेट नहीं रहा है. लेकिन इस बार यह टकराव मैदान से ज्यादा बोर्डरूम और बयानबाजी में खेला गया. आखिरकार, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की मजबूरियों और व्यावसायिक हकीकत के सामने PCB को झुकना पड़ा.

अब 15 फरवरी को भारत और पाकिस्तान आमने-सामने होंगे. सवाल यह नहीं है कि मैच होगा या नहीं- सवाल यह है कि इस पूरे प्रकरण में पाकिस्तान क्रिकेट ने क्या खोया और क्या पाया... और इस बहस के केंद्र में रहेंगे- PCB चीफ मोहसिन नकवी, जिनके 'अपने लिए कुछ नहीं किया' वाले बयान ने पूरे यू-टर्न को और ज्यादा असहज बना दिया है.

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