785 दिन का इंतजार, घरेलू मेहनत और धमाकेदार वापसी... भारतीय क्रिकेट के 'सिंड्रेला मैन' बने ईशान किशन

ईशान किशन ने न्यूजीलैंड के खिलाफ रायपुर टी20 मैच में 76 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली. ईशान किशन ने मेहनत से अपनी वापसी का अध्याय लिखा है. ईशान ने घरेलू क्रिकेट में रन बनाए और फिर से भारतीय टीम में दोबारा जगह बनाई.

Advertisement
ईशान किशन ने रायपुर टी20 में धमाकेदार प्रदर्शन किया. (Photo: Getty) ईशान किशन ने रायपुर टी20 में धमाकेदार प्रदर्शन किया. (Photo: Getty)

aajtak.in

  • रायपुर,
  • 24 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:16 AM IST

जब ईशान किशन की भारतीय टीम में वापसी को देखा जाता है, तो इसमें हॉलीवुड की मशहूर फिल्म 'सिंड्रेला मैन' की झलक साफ नजर आती है. एक ऐसा खिलाड़ी, जिसे खेल से बेइंतहा प्यार था, लेकिन हालात और परिस्थितियों ने उसे लंबे समय तक टीम से बाहर बैठने पर मजबूर कर दिया. फिर आया इंतजार, संघर्ष और खुद को दोबारा साबित करने का दौर.

Advertisement

ईशान किशन के लिए यह ब्रेक उनकी मर्जी से नहीं था. बीसीसीआई का संदेश बिल्कुल साफ था कि अगर भारतीय टीम में वापसी चाहिए, तो घरेलू क्रिकेट में रन बनाकर दिखाने होंगे. भारतीय क्रिकेट ने पहले भी कई ऐसे टैलेंट देखे हैं, जिन्हें कभी 'अगला बड़ा सितारा' कहा गया, लेकिन वे धीरे-धीरे गुमनामी में चले गए. विनोद कांबली से लेकर पृथ्वी शॉ तक, कई नाम सामने हैं.

एक समय ऐसा भी लगने लगा था कि ईशान किशन भी इसी लिस्ट में शामिल हो जाएंगे, लेकिन ईशान ने हार मानने से इनकार कर दिया. भारतीय टीम से 785 दिन बाहर रहने के बावजूद उन्होंने अपने करियर पर पानी नहीं फिरने दिया. न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के पहले मैच में उन्होंने पुराने अंदाज़ की झलक जरूर दिखाई, लेकिन रायपुर में खेले गए दूसरे मैच में ईशान ने पूरी दुनिया को बता दिया कि वे किस मिट्टी के बने हैं.

Advertisement

ईशान ने सिर्फ 32 गेंदों पर 76 रन बनाए और भारत को रिकॉर्डतोड़ जीत दिलाने में मदद की. मैच के बाद मोहम्मद कैफ ने बिल्कुल सही बात कही. कैफ ने X पर लिखा, 'ईशान किशन की सबसे बड़ी ताकत है उनका भरोसा और उनकी मेहनत. यही वजह है कि वह हर गिरावट के बाद उठते हैं. यह उनके लिए एक असली कमबैक है.'

एक जुझारू बॉक्सर की तरह ईशान लगातार बड़े शॉट खेलते रहे. गेंद ही नहीं, उनका बल्ला भी कई बार हवा में उड़ता दिखा. हालात ऐसे थे कि मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों को भी हेलमेट पहनने की जरूरत महसूस हो रही थी.

वर्तमान में रहना ही सबसे बड़ा सबक
किसी बड़े झटके के बाद अक्सर खिलाड़ी भविष्य के बारे में ज्यादा सोचने लगते हैं, जो नुकसानदायक होता है. विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज भी हमेशा 'वर्तमान में रहने' की बात करते आए हैं. ईशान किशन ने भी यही रास्ता अपनाया/ जनवरी 2024 से जनवरी 2026 तक उन्होंने घरेलू क्रिकेट में जमकर रन बनाए. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि तब आई, जब उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप 2026 से ठीक पहले झारखंड की कप्तानी करते हुए टीम को पहली बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जिताई. ईशान ने 10 पारियों में 517 रन बनाए, वह भी 197 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से.

Advertisement

रायपुर मैच के बाद ईशान ने कहा, 'मैंने यही सीखा कि वर्तमान में रहना सबसे जरूरी है. जिंदगी बहुत लंबी है, छोटे-छोटे संघर्षों से घबराना नहीं चाहिए. ऐसे हालात हमें और मजबूत बनाते हैं. शांत रहना और उस दिन जो जरूरी है, वही करना.' जब कोई खिलाड़ी भारतीय टीम से वापस अपनी राज्य टीम में लौटता है, तो उसे खास नजरों से देखा जाता है. विराट कोहली का दिल्ली के लिए खेलना हो या रोहित शर्मा का मुंबई के लिए लौटना, हर जगह प्रेरणा मिलती है.

ईशान किशन भले ही सुपरस्टार न हों, लेकिन वह एक वनडे दोहरा शतक लगाने वाले खिलाड़ी हैं. झारखंड जैसी टीम के लिए, जो अभी भी मुंबई या कर्नाटक जैसी बड़ी टीमों से मुकाबला कर रही है, ईशान का अनुभव बेहद अहम था. उन्होंने कुमार कुशाग्र, अनुकूल रॉय और रॉबिन मिंज जैसे युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई.

ईशान ने व्यक्तिगत उपलब्धियों से ज्यादा टीम को प्राथमिकता दी और यहीं से उनके खेल में नया निखार आया. उन्होंने कहा, 'जब आप लौटते हैं, तो आप एक उदाहरण बनना चाहते हैं. हमारी टीम का इतिहास बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन हम सब मिलकर आगे बढ़ना चाहते थे. घरेलू क्रिकेट में हमारा फोकस था कि व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ज्यादा टीम को फायदा हो. साथियों की मेहनत देखकर मैंने भी बहुत कुछ सीखा.'

Advertisement

गंभीर और टीम इंडिया का सपोर्ट सिस्टम
किसी भी कमबैक के लिए सिस्टम के भीतर भरोसा होना बेहद जरूरी होता है. गौतम गंभीर को लेकर चाहे जितनी आलोचना हो, लेकिन खिलाड़ियों से उनका तालमेल मजबूत रहा है. ईशान किशन के मामले में भी यह साफ दिख रहा है. ईशान ने बताया, 'सेलेक्शन के बाद जब मैंने गौतम सर से बात की तो उन्होंने कहा कि वही करो जो घरेलू क्रिकेट में कर रहे थे. पूरी आजादी, कोई दबाव नहींयटीम का माहौल भी वैसा ही था और सब एक-दूसरे के लिए अच्छा चाहते थे.'

मैच के बाद सूर्यकुमार यादव का ईशान को गले लगाना और गौतम गंभीर का पीठ थपथपाना यह दिखाता है कि टीम किस तरह उनके साथ खड़ी है. ईशान ने मुस्कुराते हुए कहा, 'मैं शतक बनाना चाहता था, लेकिन कभी और सही. हार्दिक भाई ने कहा था कि दांत भींचकर जोर से मारो, सॉफ्ट नहीं. आज वही किया और काम कर गया.'

टी20 वर्ल्ड कप नज़़दीक है और ईशान किशन की फॉर्म ने यह साफ कर दिया है कि जरूरत पड़ने पर वह मैच जिताने का दम रखते हैं. उनमें भूख लौट आई है, आत्मविश्वास वापस आ गया है और कहानी एक बार फिर शुरू हो चुकी है. भारतीय क्रिकेट का यह 'सिंड्रेला मैन' अब सिर्फ लौटा नहीं है, वह टिकने और चमकने के इरादे से आया है.

Advertisement

(रिपोर्ट: Alan Jose John)

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement