इंग्लैंड की टीम इंटरनेशनल क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है. कुछ दिनों पहले इंग्लैंड ने टी20 वर्ल्ड कप 2022 पर कब्जा किया था. अब उसने रावलपिंडी की बेजान पिच पर 20 विकेट चटकाकर पाकिस्तान को हारने के लिए मजबूर कर दिया. देखा जाए तो इंग्लिश क्रिकेट में क्रांति 2015 के विश्व कप के बाद शुरू हुई थी. साल 2015 के उस वर्ल्ड कप में इंग्लैंड को बांग्लादेश के हाथों हार के चलते ग्रुप-स्टेज से ही बाहर होना पड़ा था. बदलाव के सबसे बड़े जनक इयोन मॉर्गन और ट्रेविस बेलिस रहे जिनके नेतृत्व में इंग्लैंड ने आक्रामक क्रिकेट खेलने पर जोर दिया.
बाद में बटलर, स्टोक्स जैसे प्लेयर्स ने इसे आगे बढ़ाया. इस बदलाव का नतीजा भी सबके सामने आ चुका है. इंग्लैंड आज की तारीख में वनडे और टी20 वर्ल्ड कप की चैम्पियन है. इंग्लैंड ने तो अब टेस्ट क्रिकेट को भी आक्रामक तरीके से खेलना शुरू किया है जब से बेन स्टोक्स टीम के कप्तान और ब्रेंडन मैक्कुलम हेड कोच बने हैं. टी20 वर्ल्ड कप में निराशाजनक प्रदर्शन करने वाली टीम इंडिया भी इंग्लिश टीम से काफी कुछ सीख सकती है.
1. सिर्फ आक्रामक क्रिकेट: बेन स्टोक्स और मैकुलम के नेतृत्व में इंग्लैंड की टीम आक्रामक क्रिकेट खेलने वाली इतिहास की पहली टीम नहीं है. पिछले दशकों में कई टीमों ने इसे किया है और इससे कोई इनकार नहीं कर सकता है. लेकिन टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि शुरुआती दिन इंग्लैंड ने 500 रन स्कोर किए हो. बेशक पहले दिन के खेल की पिच अच्छी मानी जाती है लेकिन एक ही दिन में 500 प्लस रन बनाना कोई आसान काम नहीं है. भारत समेत बाकी टीमें इंग्लैंड से आक्रामक क्रिकेट खेलने की प्रेरणा ले सकती हैं.
2. ऑलराउंडर्स को तवज्जो: इंग्लैंड की टीम उन खिलाड़ियों को ज्यादा तवज्जो दे रही है जो गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों कर सकते हैं. पाकिस्तान के खिलाफ पहले टेस्ट में इंग्लैंड की ओर से लियाम लिविंगस्टोन और विल जैक्स को खेलने का मौका था. ये दोनों ही खिलाड़ी मूलत: बल्लेबाज हैं लेकिन बॉलिंग करने की भी इनमें काबिलियत है. जैक्स ने तो लगभग 46 ओवरों की गेंदाबजी की. क्रिकेट के प्रति इंग्लैंड के इस दृष्टिकोण से भारत जैसी टीमों के खिलाड़ी प्रेरणा ले सकते हैं. गौरतलब है कि भारतीय टीम को कई मौकों पर छठे/सातवें गेंदबाज की कमी खलती दिखी है.
3. निर्भीक फैसले: टेस्ट क्रिकेट में रिजल्ट हासिल करने के लिए थोड़ा रिस्क लेना पड़ता है, इंग्लैंड ने ये बात साबित करके दिखाया है. पाकिस्तान के खिलाफ पहले टेस्ट में इंग्लैंड ने दोनों इनिंग्स में 6 से ज्यादा की औसत से रन बनाए ही. इस दौरान इंग्लिश टीम ने दूसरी पारी को घोषित करके थोड़ा जोखिम भी लिया. एक समय तो पाकिस्तान के पास जीतने का मौका बन गया था. ये अलग बात है कि पाकिस्तान की टीम लय बरकरार नहीं रख पाई और उसकी पूरी पारी 268 रनों पर सिमट गई. लेकिन एक समय जरूर पाकिस्तानी बल्लेबाजों ने इंग्लिश कैम्प में टेंशन बढ़ा दी थी.
4. खिलाड़ियों में असफलता का भय नहीं: आक्रामक क्रिकेट खेलने के कारण खिलाड़ियों में आउट होने का खतरा हमेशा बना रहता है. एक फायदा यह है कि आक्रामक शॉट खेलने के चलते रन भी अधिक तेजी से भी बनते हैं.इंग्लिश टीम का 'बैजबॉल' मॉडल भी एग्रेसिव क्रिकेट खेलने पर आधारित है. इंग्लिश खिलाड़ियों को मैक्कुलम की ओर से साफ निर्देश रहता है कि वे बिना किसी डर के अटैकिंग बैटिंग करें. भारतीय प्लेयर्स इस मामले में भी इंग्लैंड से सीख सकते हैं.
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