पांच कारण: क्यों न्यूजीलैंड से रांची में आज ही सीरीज जीत लेगी टीम इंडिया?

रांची के जेएससीए अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में भारत और न्यूजीलैंड के बीच सीरीज का तीसरा वनडे खेला जा रहा है. रांची में पहली बार ये दोनों टीमें आपस में भिड़ रही हैं. इससे पहले ये दोनों टीमें इस सीरीज में तीन मुकाबले खेल चुकी हैं जिसमें भारत 2-1 से आगे है. दोनों टीमों के बीच इस अहम मुकाबले को जीत कर जहां न्यूजीलैंड सीरीज में बराबरी करना चाहेगा वहीं टीम इंडिया आज की जीत के साथ ही सीरीज को सील करना चाहेगी.

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अपने ही घर में अब तक नहीं गरजा है कैप्टन कूल धोनी का बल्ला अपने ही घर में अब तक नहीं गरजा है कैप्टन कूल धोनी का बल्ला

अभिजीत श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 26 अक्टूबर 2016,
  • अपडेटेड 2:36 PM IST

रांची के जेएससीए अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में भारत और न्यूजीलैंड के बीच सीरीज का तीसरा वनडे खेला जा रहा है. रांची में पहली बार ये दोनों टीमें आपस में भिड़ रही हैं. इससे पहले ये दोनों टीमें इस सीरीज में तीन मुकाबले खेल चुकी हैं जिसमें भारत 2-1 से आगे है. दोनों टीमों के बीच इस अहम मुकाबले को जीत कर जहां न्यूजीलैंड सीरीज में बराबरी करना चाहेगा वहीं टीम इंडिया आज की जीत के साथ ही सीरीज को सील करना चाहेगी. चलिए हम आपको बताते हैं कि कीवी टीम की कोशिशों के बावजूद वो कौन से पांच कारण हैं जिसकी बदौलत टीम इंडिया रांची में जीत दर्ज करने की प्रबल दावेदार है.

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अब तक रांची के जेएससीए अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में तीन अंतरराष्ट्रीय वनडे खेले जा चुके हैं और यहां टीम इंडिया कभी हारी नहीं है. इंग्लैंड के खिलाफ 19 जनवरी 2013 को धोनी की कप्तानी में 7 विकेट से तो 16 नवंबर 2014 को विराट की कप्तानी में श्रीलंका के खिलाफ तीन विकेट से जीत मिली. जबकि 23 अक्टूबर 2013 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला गया वनडे बारिश की वजह से बेनतीजा रहा.


भले ही रांची वनडे कप्तान धोनी का घर है लेकिन यहां उन्होंने केवल 10 रन बनाए हैं. जबकि टेस्ट कप्तान विराट कोहली यहां शतक के साथ ही अर्धशतक भी जड़ चुके हैं. आज से पहले के तीन मैचों में से एक में विराट को बल्लेबाजी का मौका मिला नहीं और दो में उन्होंने 77 और 139 का स्कोर बनाया. विराट के नाम अब तक रांची में 216 रन हैं और यहां उनसे ज्यादा रन बनाने वाला कोई क्रिकेटर नहीं हैं. खास बात यह है कि इन दोनों ही पारियों में विराट नॉट आउट रहे. एक बार फिर विराट अपने शानदार फॉर्म में हैं और उनसे फिर एक बड़ी पारी की उम्मीद भी है.

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रांची में दो साल बाद वनडे खेला जा रहा है और संभवतः महेंद्र सिंह धोनी अपनी कप्तानी में यहां आखिरी बार खेल रहे हैं. पिछले मैच में कप्तान धोनी अपने कंधों पर जिम्मेदारी लेते हुए पहले बल्लेबाजी के लिए उतरे थे और बहुत दिनों के बाद उनके प्रशंसकों को धोनी की शानदार पारी देखने को मिली. एक साल के बाद धोनी के बल्ले से अर्धशतक निकला. अपने 80 रनों के दौरान धोनी वनडे में सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ते हुए सबसे अधिक छक्का जड़ने वाले भारतीय क्रिकेटर बने. इस सीरीज के पहले तीन वनडे मैचों में धोनी 21, 39 और 80 रनों की पारियां खेल चुके हैं. ऐसे में अपनी ही धरती पर उनके बल्ले के एक बार फिर गरजने की उम्मीद करना बेमानी नहीं है.


रांची में टीम इंडिया ने अब तक विपक्षी टीम के टोटल को चेज किया है. यानी बल्लेबाजी बाद में की है. न्यूजीलैंड के खिलाफ आज के मैच में भी भारत पहले फील्डिंग ही कर रहा है. मतलब साफ है, बाद में फील्डिंग के दौरान न्यूजीलैंड के लिए बॉलिंग आसान नहीं होगी क्योंकि ओस अपना करामात जरूर दिखाएगी और यह बात भारतीय टीम को बखूबी पता है. टॉस जीत कर न्यूजीलैंड का पहले बल्लेबाजी के लिए उतरना दिवाली गिफ्ट की तरह साबित हो सकता है क्योंकि टीम इंडिया को जीत का टारगेट पहले से पता होगा और रांची में बाद में बल्लेबाजी करने वाली टीम के ही जीतने का रिकॉर्ड रहा है. पहले बैटिंग करने वाली टीम अब तक यहां एक भी मुकाबला नहीं जीत सकी है.

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कोटला में भारत को हराने के बावजूद भारत में न्यूजीलैंड की टीम का वनडे रिकॉर्ड कुछ खास नहीं रहा है. जहां इन दोनों टीमों के बीच ओवरऑल वनडे रिकॉर्ड में भारत का पलड़ा बहुत कम मैचों के अंतर से भारी है वहीं ये रिकॉर्ड भारतीय धरती पर कीवी टीम को बहुत कमजोर दिखाते हैं. इन दोनों टीमों के बीच जहां अब तक कुल 96 वनडे मैच खेले गए हैं. भारतीय टीम का इन मैचों में 48 जीत और 42 हार का रिकॉर्ड है. ओवरऑल मामला बेहद करीबी है लेकिन भारत में खेले गए 30 मुकाबलों में से कीवी टीम केवल 6 जीत सकी है जबकि भारत 23 जीत के साथ कोसों आगे है.

यानी कुल मिलाकर सभी पांच फैक्टर्स आज टीम इंडिया की जीत की वकालत कर रहे हैं लेकिन ऐसे में ये नहीं भूलना चाहिए कि धोनी की सेना से की गई कोई एक चूक कीवियों को एक बार फिर कोटला जैसी अप्रत्याशित जीत दिला सकती है.

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